70 फ़ायदेमंद आर्थिक शब्दावली का परिभाषा भाग-4 (70 Useful Economic Terminology)

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70 फ़ायदेमंद आर्थिक शब्दावली का परिभाषा भाग-4 (70 Useful Economic Terminology) के इस पोस्ट में (173 से 246) तक में आप सभी को इनसे जुड़ी जितने भी शब्द हैं, उन सभी शब्दों को इस पोस्ट पर परिभाषित किया गया है, जिसमें आपको बैंक, फाइनेंस, मुद्रा, आदि से संबंधित सभी तरह के शब्दों का विस्तार से विश्लेषण किया गया है, जिसे पढ़ने के बाद आपका नॉलेज का काफी हद तक विस्तार होने वाला है, इसलिए इस ब्लॉग पोस्ट को कृपया करके पूरा पढ़ें-

70 फ़ायदेमंद आर्थिक शब्दावली का परिभाषा भाग-4 (70 Useful Economic Terminology)

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📚173 बफर स्टॉक (Buffer stock) : आपात स्थिति में किसी वस्तु की कमी की पूर्ति के लिए वस्तु का स्टॉक तैयार करना बफर स्टॉक कहता है।

📚174 कराघात (Impact of tax) : जिस व्यक्ति पर सर्वप्रथम कर लगाया जाता है और जिस पर कर प्रत्यक्ष मौद्रिक भाग पड़ता है तथा सरकार  जिससे कर वसूल करती है उसे करघात का कहते हैं।

📚175 कर अपवंचन (Tax evasion) : छुपाने की वह प्रक्रिया जिसमें कर अदायगी को अवैध रूप से बचा लिया जाता है अर्थात आयकर की चोरी की जाती है तो इसे हम कर अपवंचन कहते हैं तथा इसके माध्यम से संचित किए गए धन को काला धन कहते हैं।

📚176 गरीबी रेखा (Poverty line) : आय का वह न्यूनतम स्तर जिसमें जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक वस्तुओं का क्रय किया जा सके उसको गरीबी रेखा के रूप में जाना जाता है। भारत में योजना आयोग ने गरीबी रेखा को परिभाषित करने के लिए न्यूनतम आवश्यकता एवं प्रभावी उपभोग मांग को आधार बनाया, जिसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में 2400 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तथा शहरी क्षेत्र में 200 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन निर्धारित किया गया।

📚177 जनांकिकी (Demography) : किसी देश की जनसंख्या वृद्धि जनसंख्या का भौगोलिक वितरण जन्म दर मृत्यु दर प्रबंधन शिक्षा स्तर आय स्तर इत्यादि का सांख्यिकी माध्यम से अर्थशास्त्र के अंतर्गत अध्ययन करना ही जनांकिकी कहलाता है।

📚178 पावक Account चेक (Account Payee) : यह किसी चेक के बाई ओर ऊपर कोने में account pay only लिखा होता है तो उसे चेक का भुगतान केवल उसी व्यक्ति या संस्था के खाते में जमा करके हो सकता है।

📚179 बहुराष्ट्रीय निगम (Multinational Corporation) : जिस Company के कार्य का विस्तार एक से अधिक देश में होता था। जिसका उत्पादन एवं सेवा सुविधाएं उस देश के बाहर भी संपन्न होता है।

📚180 ब्रिज लोन (Bridge loan) : Companyयों द्वारा अंतरिम अवधि के लिए बैंकों से लिया जाने वाला ऋण।

📚181 बैलेंस शीट (Balance sheet) : किसी व्यापारिक संस्थान का वह लिखा पत्र जिसमें किसी निश्चित तिथि को उसके समस्त आस्तियों व देनदारियों को दिखाया गया है।

📚182 बॉण्ड या डिबेंचर (Bond or debenture) : केंद्र सरकार राज्य सरकार या किसी संस्थान द्वारा ऋण लेकर जारी किया जाने वाला ऋण पत्र जिस पर संबंधित संस्थान धारक को निश्चित दर पर ब्याज भी प्रदान करती है।

📚183 धारक बॉण्ड (Bearer bond) : वह ऋण पत्र जिसकी परिपक्वता अवधि पर कोई भी भुगतान प्राप्त कर सकता है।

📚184 भागीदारी नोट्स (Participatory notes) : विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा उन निवेशकों को निर्गत किए जाते हैं, जो भारतीय पूंजी बाजार में निवेश करना चाहते हैं, किंतु अपना रजिस्ट्रेशन सेवी के पास नहीं करना चाहते।

📚185 प्लास्टिक मनी (plastic money) : विभिन्न संस्थानों वित्तीय संस्थानों एवं कंपनियों द्वारा जारी किए गए क्रेडिट कार्ड डेबिट कार्ड इत्यादि वाले प्रकार के प्लास्टिक कार्ड जिनका प्रयोग मुद्रा के कार्यों के रूप में हो सके प्लास्टिक मनी कहलाती है।

70 फ़ायदेमंद आर्थिक शब्दावली का परिभाषा भाग-4 (70 Useful Economic Terminology) notes

70 फ़ायदेमंद आर्थिक शब्दावली का परिभाषा (70 Useful Economic Terminology)
70 फ़ायदेमंद आर्थिक शब्दावली का परिभाषा (70 Useful Economic Terminology)

📚186 गैर निष्पादन कारी परिसंपत्तियां (Non performance assets) : बैंकों द्वारा वितरण ऐसे सभी देय ब्याज जिनका किसी वित्तीय वर्ष में मूलधन का भुगतान 90 दिनों तक रोक लिया जाता है।

📚187 ले ऑफ (Lay off) : जब किसी वस्तु की मांग में कमी होने से औद्योगिक संस्थान द्वारा उत्पादन कम किए जाने के कारण कर्मचारियों की नौकरी से छटनी की जाती है तो इसे ही ले लॉक कहा जाता है।

📚188 राजस्व घाटा (Revenue deficit) : कुल राजस्व प्राप्तियों की तुलना में जब कुल राजस्व व्यय अधिक होता है तो इसे राजस्व घाटा कहा जाता है।

📚189 प्राथमिक घाटा (Primary deficit) : जब राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान को घटा दिया जाता है तो बचे अवशेष को प्राथमिक घाटा कहते हैं प्राथमिक घाटा वर्तमान वर्ष के घाटे की माप करता है इसे शुद्ध राजकीय घाटा भी कहा जाता है।

📚190 रैचेड प्रभाव (Rechelt effect) : आय में जब वृद्धि होती है तो उपभोग स्तर में तीव्र वृद्धि होती है परंतु जब आय में कमी होती है तो आय में कमी के अनुपात में उपयोग में कमी नहीं होती इसे ड्यूजेनरी की सापेक्ष आय परिकल्पना भी कहा जाता है।

📚191 लोरेंज वक्र (Lawrense Curve) : इस वक्र द्वारा लोगों के बीच आय विषमता को ज्ञात करते हैं इसे 1992 में मैक्सओ लॉरेंस ने विकसित किया लोरेंज वक्र का प्रतिबिंब उन व्यक्तियों को प्रदर्शित करता है जो एक निश्चित आय के प्रतिशत के नीचे होते हैं।

📚192 मांग का नियम (law of demand) : अन्य बातों के समान रहने पर वस्तु की कीमत तथा मांग के बीच विपरीत संबंध होते हैं अर्थात वस्तु की कीमत में कमी वस्तु की मांग में वृद्धि करेगी तथा इसके विपरीत कीमत में वृद्धि वस्तु की मांग में कमी करेगी यही मांग का नियम है।

📚193 प्रतिभूति – वित्तीय परिसंपत्तियों जैसे शेयर, डिबेंचर, व अन्य ऋण पत्रों के लिए संयुन्क्त रूप से प्रतिभूति शब्द का प्रयोग किया जाता है. बैंकिग में भी ऋणों कि जमानत के सन्दर्भ में प्रतिभूति शब्द का प्रयोग होता है।

📚194 रिवर्स रेपो रेट – बैंकों को रिजर्व बैंक के पास अपना धन जमा करने के उपरांत जिस दर से ब्याज मिलता है वह रिवर्स रेपो रेट है।

📚195 अप्रत्यक्ष कर – वह कर जिसमे कर स्थापितकर्ता (सरकार) और भुगतानकर्ता के बीच प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं होता है अर्थात जिस व्यक्ति/संस्था पर कर लगाया जाता है उसे किसी अन्य तरीके से प्राप्त किया जाता है।

📚196 राजस्व घाटा – सरकार को प्राप्त कुल राजस्व एवं सरकार द्वारा व्यय किये गए कुल राजस्व का अंतर ही राजस्व घाटा है।

📚197 सी.आर.आर.(नकद आरक्षण अनुपात) – सी.आर.आर. वह धन है जो बैंकों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास गारंटी के रूप में रखना होता है।

📚198 बैंक दर – जिस दर पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उधार देता है बैंक दर कहलाती है।

📚199 प्रत्यक्ष कर – वह कर जिसमे कर स्थापितकर्ता (सरकार) और करदाता के बीच प्रत्यक्ष सम्बन्ध होता है। अर्थात जिसके ऊपर कर लगाया जा रहा है सीधे वही व्यक्ति भरता है।

📚200 राजकोषीय घाटा – सरकार के लिए कुल प्राप्त राजस्व, अनुदान और गैर-पूंजीगत प्राप्तियों कि तुलना होने वाले कुल व्यय का अतिरेक है अर्थात आय(प्राप्तियों) के सन्दर्भ में व्यय कितना अधिक है।

📚201 बॉण्ड या डिबेंचर – ऐसे ऋण पत्र होते है जिन्हें केंद्र सरकार, राज्य सरकार, या कोई संसथान जारी करता है इन ऋण पत्रों पर एक निश्चित अवधि पर निश्चित दर से ब्याज प्राप्त होता है।

70 फ़ायदेमंद आर्थिक शब्दावली का परिभाषा भाग-4 (70 Useful Economic Terminology) की जानकारी

📚202 जीरोबेस बजट – इस बजट में किसी विभाग या संगठन कि प्रस्तावित व्यय मांग के प्रत्येक मद को शुन्य मानते हुए पुनर्मूल्यांकन किया जाता है. भारत में इसे सर्वप्रथम “काउन्सिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CISR)” में लागू किया गया और 1987-88 से सभी विभागों व मंत्रालयों में लागू हो गया।

📚203 आउटकम बजट – इसके तहत प्रत्येक विभाग/मंत्रालय के भौतिक लक्ष्यों को अल्प अवधि में निरीक्षण एवं मूल्यांकन के लिए रखा जाता है।

📚204 जेंडर बजट – इस बजट के माध्यम से सरकार महिलाओं के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए चलाये जा रहे कार्यक्रमों और योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु प्रतिवर्ष एक निश्चित राशि का प्रावधान बजट में करती है।

📚205 वैधानिक तरलता अनुपात (एस.एल.आर.) – किसी आपात देनदारी को पूरा करने के लिए वाणिज्यिक बैंक अपने प्रतिदिन कारोबार नकद सोना और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के रूप में एक खास रकम रिजर्व बैंक के पास जमा कराते है जिस एस.एल.आर. कहते है।

📚206 रेपो रेट – रेपो दर वह है जिस दर पर बैंकों को कम अवधि के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज मिलता है। रेपो रेट कम करने से बैंको को कर्ज मिलना आसान हो जाता है।

📚207 लीड बैंक योजना – जिलों की अर्थव्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से इस योजना का प्रारंभ 1939 में किया गया। जिसके तहत प्रत्येक जिले में एक लीड बैंक होगा जो कि अन्य बैंकों कि सहायता के साथ साथ कार्यक्रमों के माध्यम से वित्तीय संस्थाओ के बीच समन्वय स्थापित करेगा।

📚208 निष्पादन बजट – कार्यों के परिणामों या निष्पादन को आधार बनाकर निर्मित होने वाला बजट निष्पादन बजट है इसे कार्यपूर्ति बजट भी कहते है।

📚209 राजस्व प्राप्ति : सरकार द्वारा वसूले गए सभी प्रकार के कर और शुल्क, निवेशों पर प्राप्त ब्याज और लाभांश तथा विभिन्न सेवाओं के बदले प्राप्त रकम को राजस्व प्राप्ति कहा जाता है।

📚 210राजस्व व्यय : विभिन्न सरकारी विभागों और सेवाओं पर खर्च, ऋण पर ब्याज की अदायगी और सब्सिडियों पर होने वाले व्यय को राजस्व व्यय कहते हैं।

📚211 विनिवेश : सार्वजनिक उपक्रमों में सरकारी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया विनिवेश कहलाती है।

📚212 राष्ट्रीय ऋण : केंद्र सरकार के राजकोष में शामिल कुल ऋण को राष्ट्रीय ऋण कहते हैं। वित्तीय बजट घाटों को पूरा करने के लिए सरकार यह ऋण लेती है।

📚213 संचित निधि (कोष) : सरकार को प्राप्त सभी राजस्व, बाजार से लिए गए ऋण और स्वीकृत ऋणों पर प्राप्त ब्याज संचित निधि में जमा होते हैं।

📚214वित्त विधेयक : नए कर लगाने, कर प्रस्तावों में परिवर्तन या मौजूदा कर ढांचे को जारी रखने के लिए संसद में प्रस्तुत विधेयक को वित्त विधेयक कहते हैं।

📚215 विनियोग विधेयक : सरकार द्वारा संचित निधि से रकम निकासी को मंजूरी दिलाने के लिए संसद में प्रस्तुत विधेयक विनियोग विधेयक कहलाता है।

📚216 वित्तीय घाटा : सरकार को प्राप्त कुल राजस्व और कुल व्यय के बीच का अंतर वित्तीय घाटा कहलाता है।

📚 217  आकस्मिक निधि (कोष) : इस कोष का निर्माण इसलिए किया जाता है,  ताकि जरूरत पड़ने पर आकस्मिक खर्चों के लिए संसद की स्वीकृति के बिना भी राशि निकाली जा सके।

70 फ़ायदेमंद आर्थिक शब्दावली का परिभाषा भाग-4 (70 Useful Economic Terminology) टॉपिक

📚218 पूंजीगत व्यय : सरकार द्वारा अधिग्रहीत विभिन्न संपत्तियों पर हुए खर्च को पूंजीगत व्यय की श्रेणी में रखा जाता है।

📚219 पूंजीगत प्राप्ति : इसमें सरकार द्वारा बाजार से लिए गए ऋण, भारतीय रिजर्व बैंक से ली गई उधारी और विनिवेश के जरिये प्राप्त आमदनी को शामिल किया जाता है।

📚220 प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) : वह टैक्स, जिसे आपसे सीधे तौर पर वसूला जाता है। मसलन, इन्कम टैक्स, व्यवसाय से आय पर कर, शेयर या दूसरी संपत्तियों से आय पर कर, प्रॉपर्टी टैक्स।

📚221 अप्रत्यक्ष कर (इन्डायरेक्ट टैक्स) : वह टैक्स, जिसे आप सीधा नहीं जमा कराते, लेकिन यह आप ही से किसी और रूप में वसूला जाता है। देश में तैयार, आयात या निर्यात किए गए सभी सामानों पर लगाए जाने वाले अप्रत्यक्ष कर कहलाते हैं। इसमें उत्पाद कर और सीमा शुल्क शामिल किए जाते हैं।

📚222 नवीन पेंशन योजना (एनपीएस) : सरकार ने इसमें कई बदलाव किए हैं। नई भर्तियों को अब सरकारी पेंशन नहीं मिलेगी। कमर्चारियों को अपनी तन्ख्वाह में से ही अपनी पेंशन की बचत करनी होगी। यह बचत करना अनिवार्य नहीं है, न ही इसमें कोई अपर लिमिट है, लेकिन अगर आप इसे करते हैं, तो कम से कम 500 रुपये आपको इसमें हर महीने डालने होंगे। खास बात यह है कि निजी क्षेत्र में काम कर रहे लोग भी इसे अपना सकते हैं। फायदा यह है कि एनपीएस में जमा रकम की मियाद पूरी हो जाने पर जब कोई पैसा निकालेगा, तो उस पर उसी साल के कानून के मुताबिक टैक्स लगेगा।

📚223 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई): किसी विदेशी Company द्वारा भारत स्थित किसी Company में अपनी शाखा, प्रतिनिधि कार्यालय या सहायक Company द्वारा निवेश करने को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कहते हैं।

📚224 औद्योगिक कर : औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर लगाए जाने वाले कर। यह उस प्रतिष्ठान के मालिक पर लगाए गए व्यक्तिगत कर से अलग होता है।

📚225 सेवा कर (सर्विस टैक्स) : वह कर, जो आप सेवाओं पर देते हैं। जम्मू−कश्मीर के अलावा बाकी सभी राज्यों में सर्विस प्रोवाइडर को सर्विस टैक्स देना होता है। पहले यह 12 फीसदी था, लेकिन आर्थिक मंदी के चलते अब इसे घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। सर्विस टैक्स फोन, रेस्तरां में खाना, ब्यूटी पार्लर या जिम जाने जैसी सेवाओं पर वसूला जाता है।

📚226 वैट (वैल्यू ऐडेड टैक्स) : वैट वह कर है, जो आप किसी सामान की खरीद पर देते हैं। यह कर सेवाओं पर नहीं होता। जिन राज्यों में वैट लागू है, वहां पर एक्साइज़ ड्यूटी और सर्विस टैक्स अलग से वसूला जाता है। वैट राज्य स्तर पर वसूला जाता है। वैट वसूली की चार दरें हैं – यह शून्य से साढ़े बारह फीसदी तक होती हैं। ज़रुरी सामान – जैसे जीवनरक्षक दवाओं पर कोई वैट नहीं लगता, जबकि तंबाकू, शराब जैसे चीज़ों पर साढ़े बारह फीसदी की दर से वैट वसूला जाता है।

📚227 विक्री कर (सेल्स टैक्स) : सरकार किसी भी सामान की खरीद-फरोख्त पर कर वसूलती है। देश के ज्यादातर राज्यों मे अब सेल्स टैस की जगह वैट ने ले ली है, लेकिन सेल्स टैक्स सेवाओं पर भी वसूला जाता है। एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान के जाने पर चार फीसदी केन्द्रीय सेल्स टैक्स (सीएसटी) लगाया जाता है, जिसे अब धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है।

📚228 बजट लेखा-जोखा : वित्त वर्ष के दौरान सरकार द्वारा विभिन्न करों से प्राप्त राजस्व और खर्च के आकलन को बजट लेखा-जोखा कहा जाता है।

📚229 संशोधित लेखा-जोखा : बजट में किए गए आकलनों और मौजूदा आर्थिक परिस्थिति के मद्देनजर इनके वास्तविक आंकड़ों के बीच का अंतर संशोधित लेखा-जोखा कहलाता है। इसका जिक्र आने वाले बजट में किया जाता है।

📚230 सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी): एक वर्ष के दौरान निर्मित सभी उत्पादों और सेवाओं के सम्मिलित बाजार मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद कहा जाता है। इसमें कृषि, उद्योग और सेवा – तीन क्षेत्र शामिल होते हैं।

📚231 उत्पाद कर (एक्साइज़ ड्यूटी) : यह देश में बने और यहीं बिकने वाले सामान पर वसूला जाता है। कंपनियों को फैक्ट्री में से सामान निकालने से पहले इसे भरना ज़रूरी है। यह ज़रूरी नहीं कि एक ही तरह की चीज़ों पर बराबर एक्साइज़ ड्यूटी लगाई जाए। यह सरकार की कमाई के सबसे बड़े साधनों में से एक है।

📚232 फ्रिंज बेनेफिट टैक्स (एफबीटी) : कंपनियां अपने कमर्चारियों को फोन, कार या एलटीए, एलटीसी जैसी यात्राओं के लिए सुविधाएं देती हैं। इनके बदले उन पर जो टैक्स लगाया जाता है, उसे एफबीटी कहते हैं। लेकिन अधिकतर उद्योग संगठन या कंपनियां एफबीटी का बोझ कमर्चारियों पर ही डाल देती हैं और इसे उनकी तनख्वाह में से काटा जाता है। कंपनियां एफबीटी को टैक्स की दोहरी मार मानती हैं, क्योंकि वे आय पर भी टैक्स देती हैं और सहूलियतों पर भी।

📚233 सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीएनपी): एक वर्ष के दौरान तैयार सभी उत्पादों और सेवाओं के सम्मिलित बाजार मूल्य तथा स्थानीय नागरिकों द्वारा विदेशों में किए गए निवेश के जोड़ को, विदेशी नागिरकों द्वारा स्थानीय बाजार से अर्जित लाभ में घटाने से प्राप्त रकम को सकल राष्ट्रीय उत्पाद कहा जाता है।

📚234 आयकर (इन्कम टैक्स) : वह टैक्स, जो सरकार आपकी आय पर आय में से लेती है। आपकी आमदनी के पहले डेढ़ लाख रुपये पर कोई कर नहीं लगता। डेढ़ लाख के बाद की कमाई पर टैक्स लगता है। जिनकी तनख्वाह दस लाख रुपये सालाना से ज़्यादा है, वो टैक्स के ऊपर भी टैक्स देते हैं, जिसे सरचार्ज कहा जाता है। इन्कम टैक्स में निजी कमाई और कंपनियों की आमदनी दोनों शामिल हैं।

70 फ़ायदेमंद आर्थिक शब्दावली का परिभाषा भाग-4 (70 Useful Economic Terminology) in hindi

📚235 मानक कटौती (स्टैण्डर्ड डिडक्शन) : आप अपनी आमदनी में से इंश्योरेंस, सीपीएफ, जीपीएफ, पीपीएफ, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी), टैक्स बचाने वाले म्यूचुअल फंड, पांच साल से ज़्यादा की एफ़डी, होम लोन के प्रिंसिपल (मूलधन) जैसे निवेशों में लगा सकते हैं और ऐसे ही निवेशों को जोड़कर एक लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स में छूट दी जाती है। इस एक लाख रुपये को आपकी कुल आय में से घटा दिया जाता है और उसके बाद इन्कम टैक्स का हिसाब लगाया जाता है।

📚236 ऑफशोर फंड (Offshore Fund)

जिस फंड के अंतर्गत म्युचुअल फंड कंपनियां विदेश से धन जुटा कर देश के भीतर विनियोजित करती हैं उसे ऑफशोर फंड कहते हैं।

📚237 वेंचर कैपिटल (Venture Capital)

नये व्यवसाय की शुरुआत के लिए जुटाई जाने वाली पूंजी को वेंचर कैपिटल या साहस पूंजी या दायित्व पूंजी कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो निवेशकों द्वारा शुरु हो रही छोटी कंपनियों, भविष्य में जिनके विकास की प्रबल संभावना होती है, को उपलब्ध कराई जाने वाली पूंजी को वेंचर कैपिटल कहते हैं। कंपनियां ऐसी पूंजी जुटाने के लिए इक्विटी शेयर जारी करती हैं।

📚238 फॉरवर्ड सौदा (Forward Contract)

नकदी बाजार (शेयरों के मामले में) या हाजिर बाजार (कमोडिटी के मामले में) में किया जाने वाला सौदा जिसका निपटारा भविष्य की एक निश्चित तारीख को सुपुर्दगी के साथ निपटाया जाता है।

📚239 डेरिवेटिव (Derivative)

वैसी प्रतिभूति जिसका मूल्य उसके अंतर्गत एक या एक से अधिक परिसंपत्तियों के ऊपर निर्भर करता है या उनसे प्राप्त किया जाता है। डेरिवेटिव दो या दो से अधिक पक्षों के बीच किया जाने वाला करार है। इसका मूल्य निर्धारण उन परिसंपत्तियों के मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर किया जाता है। आमतौर पर ऐसी परिसंपत्तियों में स्टॉक, बॉन्ड, जिन्स, मुद्राएं, ब्याज-दर और बाजार सूचकांक शामिल होते हैं।

📚240 डेरिवेटिव का इस्तेमाल साधारणत: जोखिमों की हेजिंग के लिए किया जाता है लेकिन इसका प्रयोग सट्टेबाजी के उद्देश्य से भी किया जा सकता है। Example के तौर पर एक यूरोपियन निवेशक अमेरिकन Company के शेयरों की खरीदारी अमेरिकन एक्सचेंज से (डॉलर का इस्तेमाल करते हुए) करता है।

📚241 शेयर अपने पास रखते हुए उसे विनिमय दर का जोखिम बना रहता है। इस जोखिम की हेजिंग के लिए वह निवेशक विशेष विनिमय दर के मुताबिक डॉलर को यूरो में परिवर्तित करना चाहेगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वह मुद्रा की वायदा खरीद सकता है ताकि जब कभी वह अपना शेयर बेचे और मुद्रा को यूरो में परिवर्तित करे तो उसे विनिमय दर संबंधी हानि नहीं हो।

📚242ओपेन एन्डेड फण्ड (Open Ended Fund)

सतत खुली योजनाएं म्युचुअल फंडों की वैसी योजनाएं जिनकी कोई लॉक इन अवधि (वह पूर्व-निर्धारित अवधि जिससे पहले निवेश किए गए पैसों की निकासी की अनुमति नहीं होती है) नहीं होती है। इनके यूनिटों की खरीद-बिक्री तत्कालीन शुध्द परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) पर कभी भी की जा सकती है।

📚243 प्रतिभूतियां (Securities)

प्रतिभूतियां लिखित प्रमाणपत्र होती हैं जो ऋण लेने के बदले दी जाती है। इनमें जारी करने के शर्र्तों एवं मूल्यों का उल्लेख होता है तथा इनका क्रय-विक्रय भी किया जाता है। सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला बॉन्ड, तरजीही शेयर, ऋण पत्र आदि प्रतिभूतियों की श्रेणी में आते हैं। प्रतिभूति शब्द का इस्तेमाल व्यापक तौर पर किया जाता है।

📚244 शेयर विभाजन (Stock Split)

कोई Company अपने महंगे शेयर को छोटे निवेशकों के लिए वहनीय बनाने और उसे आकर्षक बनाने के लिए शेयरों का विभाजन करती है। अगर कोई Company अपने शेयरों का विभाजन 2:1 में करती है तो उसका मतलब होता है कि शेयरों की संख्या दोगुनी कर दी गई है और उसका मूल्य आधा कर दिया गया है।

📚245 मुद्रा का विनिमय मूल्य (Exchange Value of Money)

जब देश की प्रचलित मुद्रा का मूल्य किसी विदेशी मुद्रा के साथ निर्धारित किया जाता है ताकि मुद्रा की अदला-बदली की जा सके तो इस मूल्य को मुद्रा का विनिमय मूल्य कहा जाता है। वह मूल्य दोनों देशों की मुद्राओं की आंतरिक क्रय शक्ति पर निर्भर करता है।

📚246 मुद्रास्फीति (Inflation)

मुद्रास्फीति वह स्थिति है जिसमें मुद्रा का आंतरिक मूल्य गिरता है और वस्तुओं के मूल्य बढ़ते हैं। यानी मुद्रा तथा साख की पूर्ति और उसका प्रसार अधिक हो जाता है। इसे मुद्रा प्रसार या मुद्रा का फैलाव भी कहा जाता है। Ncert Notes 

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