बीमा या इंश्योरेंस क्या है उनके प्रकार और कैसे ले? (Insurance In Hindi)

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Types Of Insurance In Hindi: आज के टाइम में बीमा शब्द सामान्य हो चुका है, क्योंकि बीमा कंपनियां चाहती हैं कि हर इंसान इसे अपनी आवश्यकता मानकर जरूर अपनाएं. ताकि आपातकाल की स्थिति में वह स्वयं को एवं अपने परिवार को सुरक्षा दे सके. इसलिए बाजार में हर जगह बीमा पॉलिसी के विज्ञापन बिल्कुल आसानी से देखने को मिल जाते हैं। 

हालांकि आज भी ऐसे कई लोग हैं जिन्हें इंश्योरेंस के बारे में पता तो है, लेकिन इसकी संपूर्ण जानकारी नहीं होती है. अतः आज हम इस लेख के माध्यम से इंश्योरेंस क्या होता है” इसके प्रकार, फायदे, और नुकसान तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां आपके साथ साझा करेंगे ताकि आप यह निर्णय ले सकें की इंश्योरेंस मुझे करवाना चाहिए या नहीं। 

तो चलिए जानते है बीमा क्या है, इंश्योरेंस कैसे ले, इंश्योरेंस के प्रकार, आवश्यकता और फायदे के बारे में विस्तार से हिंदी में। 

Table of Contents

बीमा क्या है ?(Insurance In Hindi)

हिंदी भाषा में इंश्योरेंस को “बीमा” कहा जाता है और यह बीमा कंपनी और व्यक्ति के बीच का एक ऐसा माध्यम होता है, जिसमें आपको भविष्य में होने वाले किसी विशेष नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी बीमा कम्पनी द्वारा किया जाता है, जिसके बदले में आपको कम्पनी को एक निश्चित अवधि के लिए शुल्क यानी प्रीमियम देना पड़ता है। 

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दूसरे शब्दों में कहें तो आगामी भविष्य में इंश्योरेंस आपको किसी भी नुकसान से निपटने का रास्ता देता है, क्योंकि किसी भी व्यक्ति को यह नहीं पता होता है कि आने वाले कल में उसके साथ कौन -सी कैसे घटनाएं घटित होने वाली है। ऐसे में व्यक्ति अगर इंश्योरेंस करवा के रखता है तो वह आने वाले कल में होने वाले नुकसान की भरपाई तुरंत कर सकता है अथवा प्राप्त कर सकता है। 

उदाहरण के लिए मान लीजिए आप  कि आपने हेल्थ इंश्योरेंस करवा कर के रखा है, तो इसके अंतर्गत अगर कभी भी आप बीमार पड़ते हैं और उस बीमारी के इलाज के लिए आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, तो अस्पताल में आपका जो इलाज होगा, उस इलाज की पूरी रकम आपके इंश्योरेंस कंपनी के द्वारा हॉस्पिटल को दिया जाता है। 

इंश्योरेंस का मतलब क्या होता है ?(Insurance Meaning In Hindi)

इंश्योरेंस से तात्पर्य जोखिम के सुरक्षा से है. अगर किसी व्यक्ति ने किसी बीमा कंपनी से इंश्योरेंस करवा कर के रखा है तो उस व्यक्ति के भविष्य में जो भी आर्थिक नुकसान होगा , अगर वह नुकसान इंश्योरेंस के अंतर्गत आएंगे, तो वह व्यक्ति इंश्योरेंस कंपनी से अपने आर्थिक नुकसान की भरपाई प्राप्त करने का हकदार होगा। 

इसके लिए वह इंश्योरेंस कंपनी में क्लेम कर सकता है और इंश्योरेंस कंपनी को भी आवश्यक कार्यवाही पूरी करके व्यक्ति के आर्थिक नुकसान की भरपाई करनी पड़ती है। 

अगर किसी व्यक्ति ने किसी कंपनी से कार, घर या फिर स्मार्टफोन का इंश्योरेंस करवा कर के रखा है तो उस चीज के खो जाने पर या फिर टूटने अथवा क्षतिग्रस्त होने की अवस्था में इंश्योरेंस कंपनी उस चीज के मालिक को तय शर्तों के अनुसार मुआवजा भी देगी। 

आपको बता दें कि इंश्योरेंस ऐसे ही नहीं मिल जाता है बल्कि व्यक्ति को भी कंपनी में एक निश्चित प्रीमियम जमा करना पड़ता है, तब जाकर उसका इंश्योरेंस होता है. जब व्यक्ति इंश्योरेंस लेता है तो उसी टाइम उसे यह भी बता दिया जाता है कि उसे कितने रुपए का इंश्योरेंस दिया जा रहा है. लाइफ इंश्योरेंस के पैसे अलग होते हैं और जनरल इंश्योरेंस के पैसे अलग-अलग होते हैं.

इंश्योरेंस के प्रकार :-(Types of Insurance In Hindi)

जीवित और निर्जीव यही वह दो प्रकार है, जिसमें सामान्य तौर पर इंश्योरेंस को विभाजित किया जाता है, जिसमें जीवित व्यक्ति के लिए लाइफ इंश्योरेंस मतलब कि जीवन बीमा होता है और निर्जीव चीजों के लिए जनरल इंश्योरेंस मतलब की साधारण बीमा होता है। 

आइए नीचे जीवन बीमा और साधारण बीमा के बारे में जानकारी हासिल करते हैं और जानते है :– बीमा कितने प्रकार के होते हैं:-

#1 जीवन बीमा (लाइफ इंश्योरेंस):-

इंश्योरेंस करवाने वाले व्यक्ति की अकस्मात मृत्यु से जो धनराशि मिलती है उसे (लाइफ इंश्योरेंस )कहा जाता है. जीवन बीमा होने पर अगर आपकी किसी दुर्घटना में मौत हो जाती है, तो आपके परिवार वालों या फिर नॉमिनी को जीवन बीमा की पूरी राशि मिलती है। 

जीवन बीमा प्राप्त करने के लिए आपको एक साथ में या फिर हर महीने अथवा साल भर कंपनी को पैसे जमा करने पड़ते हैं जो की बहुत ही मामूली होते हैं. हालांकि उसके बदले में आपको भारी अमाउंट का जीवन बीमा मिलता है। 

जीवन बीमा भी अनेक प्रकार के होते हैं जैसे कि टर्म इंश्योरेंस, बंदोबस्त की योजना, मनी बैक पॉलिसी, संपूर्ण जीवन बीमा, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान। 

आपने LIC (लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया पॉलिसी) के बारे में तो सुना ही होगा. LIC हमारे भारत देश की सबसे पुरानी गवर्नमेंट इंश्योरेंस कंपनी है, जो अलग-अलग योजनाओं के अंतर्गत लाइफ इंश्योरेंस भी देती है। 

हालांकि इसके अलावे भी बहुत सारी इंश्योरेंस देने वाली कंपनी मार्केट में मौजूद है. LIC कंपनी अपने एजेंट को नियुक्त करती है, जिनसे मिलकर के आप अपने लिए बेस्ट जीवन बीमा पॉलिसी के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं और उसी एजेंट से अपना जीवन बीमा भी करवा सकते हैं। 

#2 साधारण बीमा (जनरल इंश्योरेंस):-

निर्जीव चीजों के क्षतिग्रस्त होने पर या उनकी टूटी -फूटी की भरपाई होने पर जो बीमा करवाया जाता है, उसे साधारण बीमा यानी की “जनरल इंश्योरेंस” कहा जाता है. जनरल इंश्योरेंस में मकान का बीमा, गाड़ी का बीमा, ट्रैवल बीमा, स्वास्थ्य बीमा शामिल होते हैं. इसके अलावे जनरल इंश्योरेंस में दुर्घटना, चोरी, आग, बाढ़ और इंसानों के द्वारा बनाई गई आपदाएं भी शामिल होती हैं। 

अधिकतर देखा गया है कि जनरल इंश्योरेंस करवाने के लिए व्यक्ति को एक ही बार में इंश्योरेंस के पूरे पैसे जमा करने होते हैं, जो कि एक निश्चित टाइम के लिए होता है. उसके बाद जनरल इंश्योरेंस एक्सपायर हो जाता है और फिर से व्यक्ति चाहे तो निश्चित अमाउंट भर के उसे फिर से तय समय के लिए आगे बढ़ावा सकता है.

#3 संपूर्ण जीवन बीमा (Whole Life Insurance):-

संपूर्ण जीवन बीमा योजना में व्यक्ति को पूरी जिंदगी का कवरेज हासिल होता है यानी कि व्यक्ति को 100 वर्ष का कवरेज मिला होता है। संपूर्ण जीवन बीमा में मैच्योरिटी की उम्र 100 वर्ष होती है।  इस प्रकार से इस बीमा योजना में बीमा लेने वाले व्यक्ति को उसकी मौत तक का कवर किया जाता है.

 हालांकि यह तभी होता है जब सभी प्रीमियम राशि की पूरी पेमेंट की गई हो. अगर कोई व्यक्ति मैच्योरिटी पीरियड तक जिंदा रहता है तो यह स्कीम खुद ही मैच्योर हो जाती है, जिसकी वजह से इस योजना को लेने वाले व्यक्ति को मैच्योरिटी का लाभ मिलता है साथ ही सर्वाइवल फायदा भी मिलता है। 

#4 टर्म जीवन बीमा (Term Life Insurance):-

यह स्पष्ट जीवन बीमा पॉलिसी होती है जो निश्चित अवधि के लिए कवरेज देती है. अगर इस बीमा को लेने वाले व्यक्ति की मौत बीमा पॉलिसी की अवधि के दरमियान हो जाता है तो मृत्यु लाभ के रूप में जो नॉमिनी व्यक्ति को एकमुश्त पैसे प्राप्त होते हैं.

#5 बंदोबस्त की योजना (Endowment Plan):-

यह योजना आपका लाइफ कवर देती है और जो व्यक्ति इस योजना को लेता है उसे एक निश्चित समय में दैनिक रूप से सेविंग करने में सहायता करती है ताकि मैच्योरिटी पर वह जिंदा रहने पर एक साथ भारी भरकम पैसे ले सकें.

#6 यूनिट लिंक्ड बीमा योजना (Unit Linked Insurance Plan):-

यूनिट लिंक्ड बीमा योजना के अंतर्गत व्यक्ति को इंश्योरेंस कवर तो मिला होता ही है साथ ही वह चाहे तो इन्वेस्टमेंट भी कर सकता है।  यह एक बहुत ही स्पेशल प्लान होता है जिसमें इंश्योरेंस कंपनी बीमा देती है, साथ ही वह इन्वेस्टमेंट करने का मौका भी देते हैं। यानी कि इस प्लान के अंतर्गत इन्वेस्टमेंट के दो बेनिफिट होते है।  आपको टर्म इंश्योरेंस प्लान की तरह लाइफ कवर भी मिलता है साथ ही आप इन्वेस्टमेंट भी कर सकते हैं। 

#7 मनी बैक नीति (Money Back Policy):-

मनी बैक पॉलिसी के अंतर्गत अगर पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके बाद उसके परिवार वालों को बीमा के पैसे मिलते हैं. इसके साथ ही पॉलिसी समय के दरमियान भी इकट्ठा हुए पैसे मिले होते हैं. यह रकम बराबर-बराबर अवधि में बराबर-बराबर हिस्से में डिवाइड होता है.

भारत में बीमा का इतिहास(Indian Insurance History):-

भारत में साल 1818 में पहली बार इंश्योरेंस कंपनी स्थापित हुई थी। उस इंश्योरेंस कंपनी का नाम (ओरिएंटल लाइफ इंश्योरेंस कोलकाता) था। इसके बाद आगे बढ़ते हुए साल 1823 में एक अन्य कंपनी स्थापित हुई, जिसका नाम (मुंबई लाइफ एश्योरेंस कंपनी) थी और फिर साल 1829 में मद्रास इक्वेटेड आश्वासन कंपनी की भी शुरुआत हुई.

हालांकि आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि साल 1912 में ही इंडियन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का अधिनियम 1912 पारित किया गया था, जिसकी वजह से इंश्योरेंस संचालित हुआ।  आपको बता दें साल 1938 तक हमारे देश में लगभग 176 इंश्योरेंस कंपनी बन चुकी थी और इसी दरम्यान भारत में इंश्योरेंस अधिनियम 1938 को भी पास किया गया था जिसके अंतर्गत लाइफ इंश्योरेंस और जनरल इंश्योरेंस दोनों ही कवर होते थे। 

इंश्योरेंस लेने हेतु दस्तावेज:-

आप चाहे तो जनरल इंश्योरेंस लेना चाहते हो या फिर तो लाइफ इंश्योरेंस लेना चाहते हो, आपको कुछ ना कुछ डॉक्यूमेंट प्रस्तुत करने की आवश्यकता अवश्य ही पड़ती है।  इसलिए नीचे हमने उन महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट के नाम आपको दिए हैं, जिसकी आवश्यकता आपको इंश्योरेंस करवाने के दरमियान पड़ती है। 

  • आधार कार्ड
  • वोटर आईडी कार्ड
  • पैन कार्ड
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • पासपोर्ट
  • राशन कार्ड
  • बिजली का बिल
  • टेलीफोन बिल.
  • 10वीं या 12वीं की मार्कशीट
  • आय प्रमाण पत्र
  • पिछले 3 से 6 महीनों की सैलरी स्लिप

कुछ स्कीम ऐसी होती है, जिसमें व्यक्ति को अपना मेडिकल चेकअप भी करवा करके देना होता है, ताकि यह साबित हो जाए कि उसे पहले से ही कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है।  हमने ऊपर आपको जिन दस्तावेज के नाम बताये हैं, कंपनी उन दस्तावेज के अलावा आपके अन्य दस्तावेज की भी डिमांड कर सकती है, जिसे आप को प्रस्तुत करना पड़ेगा। 

इंश्योरेंस कैसे ले ?(Insurance Kaise Le)

इंश्योरेंस आप ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही ले सकते हैं. आज के टाइम में पेटीएम, फोन पे, गूगल पे और पालिसी बाजार जैसी कुछ ऐसी एप्लीकेशन है, जो आपको घर बैठे ही लाइफ इंश्योरेंस के साथ-साथ जनरल इंश्योरेंस खरीदने का अवसर भी देते हैं. आप ऑनलाइन के जरिए भी इस्तेमाल करके घर बैठे इंश्योरेंस खरीद सकते हैं। अगर आप ऑफलाइन इंश्योरेंस लेना चाहते हैं तो आपको इंश्योरेंस एजेंट से संपर्क कर सकते है। 

जिस किसी भी कंपनी से इंश्योरेंस लेना चाहते हैं तो आपको उस कंपनी में जाना है या फिर उस कंपनी के इंश्योरेंस एजेंट से मिलना होगा और उनसे इंश्योरेंस लेने से संबंधित बातचीत करनी है।  इसके बाद वह आपको इंश्योरेंस का प्लान बताएंगे और इंश्योरेंस की अमाउंट भी बताएंगे, साथ ही आपको यह भी बताएंगे कि आपको इंश्योरेंस के पैसे एक साथ ही भरने हैं या फिर हर महीने अथवा एक साल में भरने हैं। 

इस प्रकार सभी जानकारी प्राप्त करने के पश्चात आपको एक एप्लीकेशन फॉर्म दिया जाएगा, जिसमें आपको हर एक महत्वपूर्ण जानकारियों को भरना होगा।  इसके बाद आपको इंश्योरेंस का प्रीमियम भरना पड़ेगा। इस प्रकार आपको इंश्योरेंस मिल जायेगा। 

आप किस प्रकार का इंश्योरेंस लेते हैं, इस प्रकार के इंश्योरेंस को आपको जब कभी भी आवश्यकता हो तब आप पाने के लिए क्लेम कर सकते हैं. हालांकि इसके लिए कुछ नियम भी होते हैं जिन्हें आपको अवश्य ही पूरा करना पड़ेगा, तभी आपको इंश्योरेंस की अमाउंट मिलेगी। 

इंश्योरेंस के फायदे (Benefits of Insurance In Hindi):-

नीचे जानिए इंश्योरेंस के मुख्य फायदे कौन -कौन से है। 

  • अगर आपके पास इंश्योरेंस मौजूद होता है तो आप इमरजेंसी की अवस्था में आने वाली विपत्तियों से बचा  जा सकता हैं। 
  • लाइफ इंश्योरेंस होने की वजह से आपकी मृत्यु के पश्चात आपके परिवार वालों को निश्चित अमाउंट मिलता है, जिससे वह आगे का जीवन यापन कर सकते हैं। 
  • जनरल इंश्योरेंस होने की वजह से आपके नुकसान की भरपाई होती है, जिससे आप आर्थिक तौर पर परेशान नहीं सकते हैं। 
  •  आप चाहे तो अपने इंश्योरेंस पॉलिसी को गारंटी के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं और बैंक से अच्छी लोन भी ले सकते हैं। 
  • अगर हमारी कोई ऐसी चीज खराब हो जाती है जिसे बनवाने में काफी ज्यादा पैसे लग रहे हैं और उस चीज का इंश्योरेंस नहीं है तो आपको वह सभी पैसे अपनी जेब से देने होंगे परंतु अगर उस चीज पर इंश्योरेंस है तो उस चीज को बनवाने के सभी पैसे इंश्योरेंस कंपनी देगी जिससे आपकी जेब पर आर्थिक बोझ नहीं आएगा। 

इंश्योरेंस के नुकसान:-

नीचे आपको इंश्योरेंस के नुकसानों की जानकारी बताई गई है। 

  •  इंश्योरेंस क्लेम करने के लिए आपको काफी परेशानी उठानी पड़ती है क्योंकि सामान्य तौर पर कंपनी जल्दी इंश्योरेंस देने के लिए राजी नहीं होती है। 
  •  कभी कभार व्यक्ति को इंश्योरेंस का क्लेम प्राप्त करने के लिए इंश्योरेंस एजेंट को घुस तक भी देनी पड़ती है क्योंकि घुस पाने के बाद ही इंश्योरेंस एजेंट काम करते हैं। 
  • जनरल इंश्योरेंस के अंतर्गत व्यक्ति को एक साथ ही इंश्योरेंस का पूरा पैसा भरना  पड़ता है। ऐसे में उसकी जेब खाली हो जाती है। 

इंडिया की इंश्योरेंस देने वाली कंपनियां:-

नीचे आपको इंडिया में मौजूद कुछ ऐसी कंपनियों के बारे में बताया गया है, जो लाइफ इंश्योरेंस देती है साथ ही जनरल इंश्योरेंस भी देते हैं। 

  • एलआईसी इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया
  • आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस
  • एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस
  • एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस
  • न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
  • ओरिएंटल जनरल इंश्योरेंस
  • श्रीराम जनरल इंश्योरेंस
  • मैक्स बूपा इंश्योरेंस

इंश्योरेंस की आवश्यकता क्या होती है?

कल क्या होगा किसी ने भी नहीं देखा है। इसलिए किसी को भी नहीं पता है कि कल क्या हो जाए और वैसे भी इंसानों की जिंदगी संभावनाओं पर टिका रहता है।  आज कुछ चीजें अच्छी है तो ऐसा नहीं है कि कल भी वो चीजें अच्छी ही रहेगी। इसलिए कल के जोखिम से बचने के लिए इंश्योरेंस की आवश्यकता होती है। 

नीचे कुछ हमने ऐसी महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में बताया है, जिससे यह अनुमान आप लगा सकते है कि इंश्योरेंस की आवश्यकता क्या है। 

  • प्रॉपर्टी कभी भी खराब हो सकती है या फिर नष्ट हो सकता है। इसीलिए प्रॉपर्टी का भी बीमा करवाया जाता है ताकि उसके खराब होने पर या फिर नष्ट होने पर बीमा की राशि प्राप्त हो सके। 
  • जिस चीज का बीमा करवाया गया है उसे नुकसान भी हो सकता है और यही नहीं भूकंप भी आ सकते है। इस प्रकार से संभावित नुकसान से सुरक्षा की प्राप्ति के लिए बीमा की आवश्यकता होता है। 
  • व्यक्ति के पास हर टाइम पर्याप्त मात्रा में पैसे उपलब्ध हों, यह आवश्यक नहीं होता है. ऐसे में कभी अगर किसी ऐसी चीज का नुकसान हो जाता है, जिसमें अधिक पैसे लगते हैं तो व्यक्ति परेशान हो जाते है परंतु वह अगर उस चीज का बीमा होता है तो व्यक्ति पर आर्थिक संकट नहीं आता है। इसलिए बीमा की आवश्यकता होती है। 

इंश्योरेंस क्लेम कैसे करें ?(Insurance Claim Kaise Kare)

नीचे आपको लाइफ इंश्योरेंस और जनरल इंश्योरेंस क्लेम करने का तरीके बताये जा रहे है। 

लाइफ इंश्योरेंस क्लेम कैसे करे?

लाइफ इंश्योरेंस का क्लेम करने के लिए आपको जिस व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है, उस व्यक्ति की मृत्यु की पूरी जानकारी उस व्यक्ति ने जिस कंपनी से इंश्योरेंस करवाया है उसे देने होते है, जिसमें आपको मृत्यु का टाइम , स्थान और मृत्यु का कारण बताना होता है, साथ ही आपको जरूरी दस्तावेज भी कंपनी में जमा करने पड़ते हैं। इन दस्तावेज में व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण -पत्र अवश्य होना चाहिए। 

अगर व्यक्ति की बॉडी का पोस्टमार्टम किया गया है तो आप को पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी जमा करनी पड़ेगी। इसके पश्चात कुछ आवश्यक कार्रवाई भी की जाती है और अगर कंपनी को यह लगता है कि वास्तव में व्यक्ति की मृत्यु उस कंडीशन में हुई है, जिस कंडीशन के अंतर्गत उसे बीमा की राशि मिलनी चाहिए, तो लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की राशि नॉमिनी या फिर मृत हो चुके व्यक्ति के परिवार वालों को दिया जाता है। 

जनरल इंश्योरेंस क्लेम कैसे करे ?

आपको सबसे पहले दुर्घटना का स्थान, दुर्घटना का कारण और किस चीज का नुकसान हुआ है उसकी फोटो खींचनी है और आपको इंश्योरेंस एजेंट के पास जाना है या फिर इंश्योरेंस एजेंट को खुद ही दुर्घटना के स्थान पर बुला लेना है। इसके बाद इंश्योरेंस एजेंट खुद ही आवश्यक कार्रवाई करेगा और निश्चित टाइम में सारी प्रक्रिया पूरी करके आपको इंश्योरेंस की अमाउंट मिल जाएंगी। 

FAQs:- Insurance Kya Hai In Hindi

इंश्योरेंस को हिंदी में क्या कहा जाता है?

इंश्योरेंस को हिंदी में “बीमा” कहते है। 

इंश्योरेंस कितने प्रकार के होते हैं?

मुख्य तौर पर दो तरह के होते है ,जनरल इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस। 

इंश्योरेंस क्यों कराया जाता है?

भविष्य में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कराया जाता है। 

कंपनी अगर इंश्योरेंस की राशि देने से मना करे तो क्या करें?

ग्राहक कोर्ट में लिखित शिकायत दर्ज करें। 

इंश्योरेंस में प्रीमियम क्या होती है?

यह एक निश्चित अमाउंट होती है जो आपको महीने में, साल में या फिर एक साथ भरना पड़ता है। 

निष्कर्ष:- बीमा क्या है इसके प्रकार सहित पूरी जानकारी। 

दोस्तों इस लेख में हमने आपको बीमा क्या होता है और कैसे लेते है संबंधित पूरी जानकारी शेयर की है। 

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