ITR: आईटीआर भरने के दौरान अगर आप किया ये काम तो हो जाएं सावधान,लग सकती है 200% पेनल्टी

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ITR: कर में और विशेषकर टीडीएस में छूट पाने के लिए करदाताओं द्वारा लगाए गए डिडक्शन को एक बार फिर देखने-परखने और उससे संबंधी साक्ष्य जुटाकर रखने के लिए आयकर विभाग का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर करदाताओं को एक ईमेल नोटिस के माध्यम से अलर्ट कर रहे है।

31 जुलाई तक भरे गए ITR की प्रोसेसिंग में विभाग द्वारा इस वर्ष एआई के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि जिन करदाताओं का TJS कट रहा था, उनके द्वारा इस राशि को रिफंड के रूप में प्राप्त करने के लिए जो डिडक्शन क्लेम किये गए हैं, वे सही हैं या नही।

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अगर आपने इनकम टैक्स रिटर्न की प्राप्त राशि में अतिरिक्त कर कटौती का दावा किये है तो आपको फॉर्म 16 में उल्लेखित सभी आंकड़ों का विवरण रखना होगा।

अगर आप अतिरिक्त टैक्स कटौती का झूठे दावे करते है तो आप पर 200 प्रतिशत तक का जुर्माना लग सकता है।

ITR के इन मामलों में आ रहे है नोटिस

इंदौर सीए ब्रांच के पूर्व चेयरमैन सीए पंकज शाह ने कहा नोटिस ऐसे वेतनभोगी और छोटे व्यापारियों को भेजे जा रहे हैं, जिन्होंने पहली बार धारा 80जी के अंतर्गत छूट ली है।

साथ ही ऐसे भी करदाताओं को नोटिस आ रहा हैं, जिन्होंने एलआईसी के तहत छूट लिया है।

घर के लोन पर ब्याज की छूट, किराए की छूट, अन्य किसी टैक्स फ्री निवेश के रूप में ली हुई छूट भी चिह्नित कर करदाता को नोटिस भेजे जा रहे है।

ऐसे करदाता जिन्हें इस प्रकार के नोटिस आ रहे हैं, उन्हें सबसे पहले अपने द्वारा क्लेम किये गए सभी निवेशों के साक्ष्य जुटाकर रखना चाहिए।

जवाब के लिए करदाता को 15 दिन का वक्त है। छूट से संबंधित साक्ष्य करदाता के पास नहीं है, तो भी रिटर्न को रिवाइज करना बेहतर होगा नहीं तो असेसमेंट में एडिशन होने पर अतिरिक्त ब्याज और 200प्रतिशत पेनल्टी लग सकती है। रिटर्न को रिवाइज कर पेनल्टी से बचे जा सकते है।

आपको करना पड़ सकता है इन्वेस्टमेंट सर्टिफिकेट अपलोड

चार्टर्डक्लब डॉट कॉम के संस्थापक और सीईओ सीए करण बत्रा ने बताया कि ” हालांकि इसकी संभावना बहुत कम है, मगर फिर भी ऐसा हो सकता है।” ऐसे स्थिति में आपको 200 प्रतिशत तक का जुर्माना भी देना हो सकता है। इससे बचने के लिए आपको ई-फाइलिंग पोर्टल पर इसके लिए दिए गये स्लॉट में इन्वेस्टमेंट सर्टिफिकेट अपलोड करना पड़ सकता है।

इसलिए यदि आपने कर और बचत इन्वेस्ट किये है। या कटौती योग्य खर्च किया है या आयकर अधिनियम की धारा 80जी के कटौती के लिए पात्र संगठनों में दान दिये है।मगर TDC के फायदे के लिए अपने नियोक्ता को इसका खुलासा नहीं किया है तो ऐसे कर-बचत निवेशों/खर्चों/दानों के प्रमाण किसी भी असुविधा से बचने के लिए सरल हैं।

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