Rupee vs dollar 80 रुपए का हुआ एक डॉलर, जानिए आप पर क्या असर पड़ेगा

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Rupee vs dollar : कई हप्ता से लगातार गिर रहा भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले 80 रुपए के स्तर पर पहुंच गया। यह पहली बार है, जब रुपया इतना नीचे गिर गया है। अगर बात सिर्फ इस साल 2022 की करें, तो आज की तारीख तक रुपए में करीब 7 % की तगड़ी गिरावट देखने को मिली है। Rupee, Dollar, Rupee Fall, Economy, Petrol, Petroleum Products, Stock Market

कई हफ्तों से लगातार गिर रहा भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले 80 रुपए के स्तर पर पहुंच गया है । यह पहली बार हुआ है, जब भारतीय रुपया इतना नीचे गिरा है। अगर बात सिर्फ इस साल 2022 की करें तो आज की तारीख तक रुपए में करीब 7 % की तगड़ी गिरावट देखने को मिली है। तो आइए जानते हैं रुपए में गिरावट का आम इंसान पर और देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा।

आम आदमी पर क्या असर होगा ?

Rupee vs dollar : भारतीय रुपए की गिरावट का आम आदमी पर सीधा असर देखने को मिलेगा। आम जनता के लिए वह हर चीज महंगी हो जाएगी जो विदेशों से आयात की होती है। सबसे बड़ा असर तो पेट्रोल-डीजल पर देखने को मिल सकता है। ऐसा इस लिए क्योंकि कच्चे तेल का आयात करने में भुगतान तो डॉलर में करना होता है। भारत अपनी जरूरत का 80 % से ज्यादा कच्चा तेल आयात ही करता है।

वर्त्तमान में ही में खबर आई थी कि कच्चा तेल गिरकर 100 डॉलर प्रति एक बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे पेट्रोल-डीजल सस्ते हो सकते हैं। फिर भी, भारतीय रुपया इतना नीचे गिर जाने के कारन राहत की उम्मीद ही टूटती नजर आ रही है। इसके अलावा भी विदेशों से आयात किए जाने वाले खाने के तेल भी महंगे हो सकते हैं। सोने का भाव एक बार फिर से तेजी से बढ़ना शुरू हो सकता है।

आयातकों को नुकसान, निर्यातकों को फायदा होगा

Rupee vs dollar : भारतीय रुपए में गिरावट का असर सबसे अधिक आयातकों और निर्यातकों पर देखने को मिल सकता है। भारतीय रुपए में गिरावट की वजह से आयात महंगा हो जाएगा, क्योंकि हमें कीमत तो डॉलर में ही चुकानी होती है। ऐसे में पहले 1 डॉलर के लिए जहां 74-75 /- चुकाने होते थे, वहीं अब 80 रुपए चुकाने पड़ेंगे। वहीं पर इसका उल्टा निर्यातकों को भारतीय रुपए में गिरावट का फायदा होगा, क्योंकि हमें भुगतान डॉलर में होता है, एवं अब एक डॉलर की कीमत रुपए के मुकाबले बढ़ चुकी है इसलिए

मसलन सॉफ्टवेयर कंपनियों और फार्मा कंपनियों को ज्यादा फायदा होता है। फिर भी कुछ एक्सपोर्टरों पर महंगाई दर ज्यादा होने से लागत का बोझ भी पड़ता है, और वह भारतीय रुपए में गिरावट का ज्यादा फायदा नहीं उठा पाते हैं। मसलन जेम्स-जूलरी, पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स, ऑटोमोबाइल, मशीनरी को आइटम बनाने वाली सभी कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इससे उनके मार्जिन पर भी असर पड़ता है।

विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों के माथे पर निराशा

Rupee vs dollar : हमारे भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ने का सपना पूरा करना दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि अब उन्हें अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए काफी अधिक पैसा खर्च करना होगा और अगर वे इस प्रकार नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें इस प्रकार का देश का चुनाव करना होगा, जहां पर पढ़ाई अपेक्षाकृत सस्ती हो। एक ओर देखा जाए तो, वित्तीय संस्थानों को लगता है, कि चिंताएं वास्तविक हैं, और ज्यादा शिक्षा ऋण लेने की जरूरत बढ़ सकती है, तो विदेश में रहने वाले शिक्षा सलाहकारों का कहना है कि उन सभी छात्रों को इतनी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, जो छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने की प्लान बना रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर , हमारे भारत से 13.24 लाख से अधिक छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए हैं, जिनमें से ज्यादातर अमेरिका (4.65 लाख), इसके बाद कनाडा (1.83 लाख), संयुक्त अरब अमीरात (1.64 लाख) और ऑस्ट्रेलिया (1.09 लाख) में भी हैं।

विदेश से रेमिटांस पाने वालों को होगा फायदा जरूर जानें

Rupee vs dollar : ऐसे बहुत अधिक छात्र हैं, जो विदेश जाकर वहां पर पढ़ने और फिर वहीं पर नौकरी करने का प्लान बनाते या कहें तो सपना देखते हैं। ऐसा इसलिए करते है क्योंकि रुपए के मुकाबले डॉलर अधिक मजबूत है। ऐसे में जब वह विदेश में पैसे कमा कर भारत देश में अपने परिवार को भेजते हैं, तो यहां उन पैसों की कीमत कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे लोगों को रुपए में गिरावट का काफी फायदा मिलेगा। यदि अगर आपके पास भी विदेश से पैसे आते हैं, तो अब आपके पहले जितने डॉलर की कीमत ही अधिक रुपयों के बराबर हो जाएगी यह अच्छी बात है

शेयर बाजार पर पड़ेगा बुरा असर

Rupee vs dollar : भारतीय रुपए में गिरावट का शेयर बाजार पर बहुत बुरा असर देखने को मिल रहा है। दरअसल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस महीने के अंत में एक बार फिर पॉलिसी रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। उसके साथ ही अमेरिका में मंदी की आशंका से भी डॉलर की मांग बढ़ रही है। इस तरह से विदेशी निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर का रुख कर रहे हैं, एवं हमारे भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे हैं। शेयर मार्किट में गिरावट की एक बहुत बड़ी वजह है,हमारे भारतीय रुपए में गिरावट। आईटी सेक्टर की कंपनियों को रुपए में गिरावट से काफी फायदा होगा। इनमें कुछ है टीसीएस, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, विप्रो और माइंडट्री शामिल हैं। इनकी ज्यादातर कमाई डॉलर से होती है। टीसीएस की कमाई में 50 % अमेरिका से आता है। इसी तरह इन्फोसिस के रेवेन्यू में 60 % हिस्सेदारी नॉर्थ अमेरिका की है। एचसीएल की 55 % कमाई केवल अमेरिका से होती है।

रुपए में गिरावट का प्रमुख कारण क्या है

Rupee vs dollar : हमारे भारतीय रुपए में कमजोरी का सबसे बड़ा कारण ग्‍लोबल मार्केट का दबाव है, जो रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से आया हुआ है। ग्‍लोबल मार्केट में कमोडिटी पर लगातार दबाव की वजह से निवेशक अभी डॉलर को ज्‍यादा पसंद कर रहे हैं, क्‍योंकि वैश्विक मार्किट में सबसे ज्‍यादा ट्रेडिंग डॉलर में ही होती है। लगातार मांग से डॉलर अभी 20 साल के सबसे मजबूत स्थिति में मौजूद है। इसके अलावा भी विदेशी निवेशक इस टाइम भारतीय मार्किट से लगातार अपनी पूंजी निकाल रहे हैं, जिससे विदेशी मुद्रा में कमी आ रही है और भारतीय रुपए पर अधिक दबाव बढ़ रहा है। वित्‍तवर्ष 2022-23 में अप्रैल से अब तक विदेशी निवेशकों ने 14 अरब डॉलर हमारे भारतीय बाजार से अपनी पूंजी निकाल लिए है।

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