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Crypto coin and Token me kya antar hai | क्रिप्टो कॉइन और टोकन में क्या अंतर है?

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Crypto coin and Token me kya antar hai | क्रिप्टो कॉइन और टोकन में क्या अंतर है?

Crypto coin and Token me kya antar hai: क्रिप्टो करेंसी आजकल हमेशा किसी न किसी न्यूज़ में आता ही रहता हैं. क्रिप्टो कॉइन और टोकन में क्या अंतर है: – कुछ निवेशक हमेशा क्रिप्टो कॉइन या क्रिप्टो टोकन को समझ नहीं पाते है और दोनों को एक ही मान लेते है. जबकि ऐसा बिलकुल होता नहीं है. इसको आसान भाषा में कहे तो क्रिप्टो सिक्के और ‘टोकन’ दोनों एक जैसे हैं, लेकिन भी वे दो अलग-अलग चीजें हैं – सभी क्रिप्टो सिक्के टोकन हैं,

Crypto coin and Token me kya antar hai | क्रिप्टो कॉइन और टोकन में क्या अंतर है?

परन्तु सभी टोकन को क्रिप्टो सिक्के नहीं कहा जा सकता है. और हमारे भारत देश में बहुत से क्रिप्टो यूजर को तो ये नहीं पता होता है कि वो क्रिप्टो कॉइन खरीद रहे है या क्रिप्टो टोकन को . हम कह सकते है की क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन, दो सबसे आम ब्लॉकचेन-आधारित डिजिटल एक संपत्ति (digital assets) हैं.

इन दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि क्रिप्टोकरेंसी के अपने ब्लॉकचेन होते हैं, और क्रिप्टो टोकन मौजूदा ब्लॉकचेन पर बनाए जाते हैं. अब बात आती है digital assets की तो इसके बारे में जानने के लिए यहाँ पर क्लिक करे

क्रिप्टो कॉइन और टोकन में अंतर ( Difference between a crypto coin and token in Hindi )

यह व्यक्तियों की नजर से काफी हद तक एक दूसरे के समान ही नजर आती हैं. हालांकि, दोनों के बीच काफी तकनीकी अंतर हैं. तो आइए तकनीकी अंतरों को अच्छी से जानने की कोशिश करते है.

क्रिप्टो कॉइन (Crypto coin)

1. कोई भी क्रिप्टोकरेंसी जिसका अपना खुद का ब्लॉकचैन होता है उसके कॉइन कहते है।
2. क्रिप्टो कॉइन स्वयं के ब्लाक चेन पर ऑपरेट होती है
3. क्रिप्टो कॉइन को पूरी तरह से पेमेंट्स के लिए यूज किया जाता है.

4. सभी क्रिप्टो कॉइन को टोकन कहा जा सकता है.
5. Examples-Bitcoin, Ripple, Ethereum, Binance coin
6. क्रिप्टो कॉइन को स्थानांतरित करते समय लेनदेन के लिए शुल्क (या गैस) कम होता है

7. जितने भी कॉइन होते है उनका खुद का ब्लॉकचेन नेटवर्क होता हैं। सबसे प्रसिद्ध उदाहरण बिटकॉइन (बीटीसी) है, जो दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। कुछ लोकप्रिय सिक्के बिटकॉइन (बीटीसी), रिपल (एक्सआरपी), एथेरियम (ईटीएच), डॉगकोइन (डीओजीई), और लिटकोइन (एलटीसी) हैं।

8. कॉइन का इस्तेमाल पैसो की तरह लेन देन के लिए किया जाता है, अगर आपको किसी को पेमेंट करनी है तो आप उसको बिटकॉइन और एथेरियम भी भेज सकते है. आज के समय में इनका इस्तेमाल साधारण पैसो की तरह भी किया जाता है.

9. किसी भी कॉइन को बनाना काफ़ी कठिन काम होता है जहा कोडिंग से लेकर कई सारी चीजो की जानकारी की जरुरत पड़ती है.

क्रिप्टो टोकन(Crypto Token)

1. कोई भी क्रिप्टोकरेंसी जो किसी पहले से मौजूद ब्लॉकचेन पर बनाया गया हो उसे टोकन कहते है।

2. इनका कोई ब्लाक चेन नहीं होता है. ये क्रिप्टो कॉइन के ब्लाक चेन पर ऑपरेट होती है.
3. क्रिप्टो टोकन को पेमेंट्स के साथ digital agreements के साथ sign करने के लिए यूज किया जाता है.

4. टोकन को क्रिप्टो कॉइन नही कह सकते है.
5. Examples- ENJIN, REN, Helium, Polkadot, BAT, Floki inu, Shiba Inu
6. टोकन स्थानांतरित करते समय अधिक महंगा होता है

7. परन्तु जितने भी टोकन होते है उनकी खुद की ब्लॉकचैन नहीं होती बल्कि वो 3rd पार्टी की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते है यानी उनको दूसरी क्रिप्टोकरेंसी की ब्लॉकचैन के ऊपर बनाया जाता है.एथेरियम पर सबसे ज्यादा टोकन को बनाया जाता है हालाँकि अब बहुत सारी क्रिप्टोकरेंसी ऐसी आ चुकी है जिनपर आसानी से टोकन को बनाया जा सकता है.

8. वही टोकन का कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है
9. कॉइन की तुलना में टोकन बनाना काफ़ी ज्यादा आसान होता है और आज के समय इस प्रकार के क्रिप्टो नेटवर्क आ चुके है जिनपर आसानी से किसी भी प्रकार के टोकन को बनाया जा सकता है.

इस पोस्ट में मैंने आपको क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन के बारे में विस्तार से बताया हूं आशा करता हूं आपको कोई ना और टोकन में अंतर समझ आ गया होगा यदि आपको यह पोस्ट से कुछ सीखने के लिए आपको मिला तो इस पोस्ट को जरूर आपने दोस्तों के साथ साझा करें धन्यवाद

Crypto Tokens kya hai (क्रिप्टो टोकन क्या होता है) क्या आप खुद का टोकन लॉन्च कर सकते हैं?

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Crypto Tokens kya hai (क्रिप्टो टोकन क्या होता है) क्या आप खुद का टोकन लॉन्च कर सकते हैं? जानें
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Crypto Tokens kya hai (क्रिप्टो टोकन क्या होता है) 

Crypto Tokens kya hai : जिस तरह से शेयर मार्केट में IPO होती है जिसे हम इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग बोलते हैं, वैसे ही टोकन्स को इनीशियल कॉइन्स ऑफरिंग के रूप में रिलीज किया जाता है. token को क्राउड सेल्स के जरिए लोगों बीच इंट्रोड्यूस किया जाता है.

जिस इन्वेस्टर आसानी से डिजिटल एसेट के रूप में ले सकते हैं , निवेशक ICO के खत्म हो जाने के बाद भी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध टोकन आसानी से खरीद सकते हैं. अगर कोई नया टोकन बनाना है, तो यह क्राउड सेल्स पर बनेगा और इन्हें कोई भी व्यक्ति बना सकता है .

आप इन्हे भी पढ़े –

डिजिटल एसेट क्या है

ऑप्शन चैन क्या है इसे कैसे पढ़े ?

करोड़पति कैसे बनें?

बीते कुछ सालों में बहुत सारे क्रिप्टो करेंसी मार्केट पर डेवलप की गई हैं, जिनमें से सबसे पॉपुलर क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin, Ethereum, Dogecoin, Litecoin जैसी करेंसी हैं. सीधे साधारण शब्दों में कहें तो क्रिप्टोकरेंसी एक तरह की डिजिटल करेंसी होती है, जो की coin या टोकन (token) किसी भी रूप में हो सकती है.

यह दोनों ही चीजें एक-दूसरे से बिलकुल अलग होती हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि आप अपना खुद का क्रिप्टो टोकन लॉन्च कर सकते हैं. इस post में हम सभी यह जानेंगे कि अपना खुद का क्रिप्टो टोकन किस प्रकार बनाया जा सकता है और क्रिप्टो कॉइन से यह अलग कैसे होता है. तो चलिए जानते है।

Crypto Tokens kya hai क्रिप्टो टोकन क्या होते हैं?

कॉइन और टोकन दोनों ही क्रिप्टोकरेंसी का एक पहलु हैं, लेकिन फर्क सिर्फ ये होता है कि कॉइन्स अपनी खुद की ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर चलती हैं. ब्लॉकचेन एक डिजिटल बहीखाता होता है, जहाँ पर लेनदेन का हिसाब होता है।

जिस पर ब्लॉक पर होने वाले ट्रांजैक्शन का डेटा हमेशा स्टोर होता रहता है. हर ब्लॉक अपने पिछले ब्लॉक से एक यूनीक हैश कोड के माध्यम से जुड़ा होता है. यह टोकन डिजिटल संपत्ति के रूप में काफी इन्वेस्टर के द्वारा रखे जाते हैं। और यह पहले से ही मौजूद किसी अन्य ब्लॉकचेन पर काम करते हैं.

उदाहरण के तौर पर इथीरियम एक ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म है और इसका अपना एक टोकन है उस टोकन का नाम ईथर है. लेकिन ईथर की ही तरह ही कई दूसरे टाइप के टोकन्स भी मार्किट में हैं, जो इथीरियम प्लेटफॉर्म पर ही रन करते हैं।

coins अपने खुद के डिजिटल बहीखाते (ब्लॉकचेन) पर चलते हैं वहीं, पर टोकन का अपना कोई प्लेटफॉर्म नहीं होता है, यह किसी और के प्लेटफॉर्म पर रन करते हैं. कॉइन्स, जो कि बस एक डिजिटल रूप पर ही हो सकती है,

यह टोकन किसी फिजिकल यानी की असली चीज को दर्शा सकते हैं. यानी हम समझ सकते है कि टोकन एक तरीके के ऑनलाइन कॉन्ट्रैक्ट होते हैं, जिन्हें हम ऑफलाइन भी आसानी से किसी चीज से असाइन किया जा सकता है, जैसे कि कोई टिकट, या कूपन या को खरीदने के लिए इसी तरह और भी अन्य चीजों को parchase करने के लिए उपयोग कर सकते है।

क्रिप्टो टोकन कैसे रिलीज होते हैं?

जिस तरह से शेयर मार्केट में IPO (इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग) खुलते हैं, उसी तरह से ही टोकन्स को इनीशियल कॉइन्स ऑफरिंग (ICO) के माध्यम से रिलीज किया जाता है. टोकन को क्राउड सेल्स के माध्यम से लोगों के बीच इंट्रोड्यूस किया जाता है.

जिस इन्वेस्टर आसानी से डिजिटल एसेट के रूप में ले सकते हैं। निवेशक ICO खत्म हो जाने के बाद भी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध टोकन आसानी से खरीद सकते हैं. अगर कोई नया टोकन मार्किट पर बनाना है तो यह क्राउड सेल्स पर ही बनेगा और इन्हें कोई भी आदमी बना सकता है. इनमे जिनकी दिलचस्पी होगी, लोग टोकन में निवेश करेंगे या फिर उस टोकन को पहले से मौजूद कॉइन्स के जरिए अपने वॉलेट पर जमा करेंगे.

क्रिप्टो टोकन कैसे लॉन्च कर सकते हैं?

यह माना जाता है कि अपना एक क्रिप्टो टोकन बनाना बहुत ही मुश्किल और लेंडी प्रक्रिया है और इसके लिए बहुत ही बारीक से तकनीकी चीजों की जानकारियां होना बहुत जरुरी होता है, और साथ में उसके लिए लिए कोडिंग बहुत अच्छी से आनी चाहिए.

परन्तु अब इस बात को सही नहीं मान सकते है. वर्तमान समय में मार्किट पर ऐसे बहुत से प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं, जहां पर लोग अपना खुद का टोकन आसानी से बना सकते हैं. उदाहरण के तौर पर एक यूजर-फ्रैंडली ऐप्लीकेशन, CoinTool आदि

आज आसानी से उपलब्धहो जाते है, जो हर लोगों को अपना खुद का एक क्रिप्टो कॉइन बनाने का मौका भी देता है. इस ऐप पर आप भी अपने टोकन का नाम और सिंबल आसानी से चूज़ कर सकते हैं.

इस प्रकार भी हो सकता है सकता है कि एक यूजर बिना किसी ICO के कोई क्रिप्टो कॉइन शुरू करे और उसे अपनी छोटी सी कम्युनिटी तक सीमित रखे, जिसमें उसके अपने दोस्त और नजदीकी परिचित निवेश कर सकते हैं.

कॉइन्स की तुलना में टोकन को बनाने में ज्यादा आसान होता है – कॉइन्स को ऑपरेट करने के लिए उनका अपना एक ब्लॉकचेन होता है, जबकि टोकन कॉइन से पहले से ही मौजूद नेटवर्क पर काम करते हैं, इसलिए उन्हें जल्दी से बनाया जा सकता है और आसानी से भी ऑपरेट किया जाता है और कॉइन के मुकाबले ये कम खर्चीले भी होते हैं.

इसके साथ ही, टोकन बनाने पर आपको कोई जुर्माना भी नहीं देना पड़ेगा है . यानी कि अगर आप अपने रूचि से क्रिप्टो टोकन बनाते हैं तो आपको कोई नुकसान नहीं होने वाला है . टोकन्स किसी भी चीज का प्रतिनिधित्व करता हैं।

इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी को मैं क्रिप्टो टोकन के बारे में समझाने का प्रयास किया हूं यदि आपको यह पोस्ट पढ़ने के बाद अच्छा लगा तो जरूर कमेंट करके बताएं धन्यवाद

What’s a Digital Asset in Hindi |*डिजिटल एसेट क्या है | Digital Asset Definition in Hindi

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*डिजिटल एसेट क्या है?

digital asset एक व्यक्ति या कंपनी के स्वामित्व वाली एक डिजिटल इकाई होती है । उदाहरणों के लिए
Examples of digital assets include:-
Photos(तस्वीरें)
Videos(वीडियो)
Design files(डिज़ाइन फ़ाइलें)
Word documents(शब्द दस्तावेज़)
PDFs(पीडीएफ)
Company branding(कंपनी की ब्रांडिंग)
Presentations(प्रस्तुतियाँ)
Marketing content and collateral( विपणन सामग्री और संपार्श्विक
इसमें शामिल हैं )
क्या इसके बारे में आपको पहले से पता था, चलिए आगे देखते हैं कुछ और महत्वपूर्ण बातें

What’s a Digital Asset in Hindi

ये संपत्ति मूर्त नहीं हैं, जिसका अर्थ यह है कि उनकी कोई भौतिक उपस्थिति नहीं है । जिनको यदि हम अपने हाथों से छूना चाहे तो नहीं छोड़ सकते हैं बल्कि हम उन्हें देख भर सकते हैं इसके बजाय, वे फाइल हैं जो storedevice पर रहती हैं, जैसे कि local computer cloud-based storage network में सुरक्षित रहती है ।

शब्द” digital asset ” एक -digital file- के लिए कानूनी स्वामित्व और मूल्य का वर्णन करता है ।
उदाहरण के लिए, यदि आप iTunes से किसी गीत को download करने के लिए $1.29 का भुगतान
करते हैं, तो यह एक डिजिटल संपत्ति बन जाती है क्योंकि आप उस गीत के स्वामी हैं ।

आपके द्वारा खरीदी गई कोई भी “stock price” डिजिटल संपत्ति हैं, क्योंकि आपके पास उपयोग के अधिकार हैं ।
जब आप कोई software operation खरीदते हैं, तो यह एक digital asset बन जाती है क्योंकि आपके पास software का उपयोग करने का licence होता है ।

brand कानून के सबंध में” digital asset” भी महत्वपूर्ण है । जब आप किसी ऐसे गीत या वीडियो
के स्वामी होते हैं, जिसे आप online खरीदते हैं,

तब भी publisher या कलाकार के पास सामग्री का brand होता है । इसका मतलब है कि आप डिजिटल सामग्री को कॉपी, वितरित या बेच नहीं सकते. हैं । इसी तरह, आप अपने digital camera या smartphone से ली गई images के brand के मालिक हैं । चलिए अब “Digital Assets DMCA” के बारे में विस्तार से जानते हैं

What’s a Digital Asset in Hindi “Digital Assets DMCA”

physical संपत्ति के विपरीत, डिजिटल संपत्ति को कॉपी और साझा करना बहुत आसान है । इसलिए,
डिजिटल डेटा को कानूनी अधिकार प्रदान करना आवश्यक है ।

संयुक्त राज्य सरकार ने 1998 में डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट( DMCA) पारित किया, जो डिजिटल डेटा और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा में मदद करता है । यह कॉपीराइट डिजिटल सामग्री के अनधिकृत प्रसार का अपराधीकरण करता है ।

कॉपीराइट उल्लंघन के बारे में सूचित किए जाने के बाद व्यक्तियों और कंपनियों को डिजिटल डेटा प्रकाशित या साझा करना बंद करने की भी आवश्यकता होती है । इस कानून ने डिजिटल मीडिया और वेब पर अद्वितीय सामग्री को सुरक्षित रखने में मदद की है ।

नोट चूंकि डिजिटल डेटा एक बाइनरी प्रारूप में सहेजा जाता है, इसलिए डिजिटल संपत्ति केवल एक
होती है और एक स्टोरेज डिवाइस में शून्य सहेजा जाता है ।

यह मामूली लग सकता है, लेकिन स्रो कोड, दस्तावेज़, चित्र, वीडियो, वेबपेज और एप्लिकेशन सहित सभी प्रकार की डिजिटल सामग्री को संग्रहीत करने के लिए लाखों या अरबों और शून्य का उपयोग किया जा सकता है ।

ये सभी डिजिटल संपत्तियां हैं, जो कानूनी रूप सेयू.एस. और अंतरराष्ट्रीय कॉपीराइट कानून द्वारा संरक्षित हैं ।
यदि आप ब्लॉकचेन और क्रिप्टो करेंसी में अभी शुरुआत कर रहे हैं, तो डिजिटल संपत्ति, क्रिप्टो कॉइन और टोकन के बीच अंतर को समझना आवश्यक है.

हालांकि इन शब्दों को अक्सर एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन वे कई महत्वपूर्ण तरीकों से भिन्न होते हैं. मोटे तौर पर, एक डिजिटल संपत्ति एक ‘non-tangible asset’ है जिसे digital format में बनाया, व्यापार और संग्रहीत किया जाता है.

ब्लॉकचेन के संदर्भ में, डिजिटल संपत्ति में ही क्रिप्टो करेंसी और क्रिप्टो टोकन शामिल हैं. non-tangible asset मतलब जिसे आप छू नहीं सकते है. इनका कोई भौतिक रूप नहीं होता है.

क्रिप्टो करेंसी और टोकन, डिजिटल संपत्ति के अद्वितीय उपवर्ग( class) हैं जो क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करते हैं, क्रिप्टोग्राफी एक advanced encryption technology है जो नकली या दोहरे खर्च की संभावना को समाप्त करके क्रिप्टो संपत्ति की प्रामाणिकता का आश्वासन देती है.

डिजिटल संपत्ति के दो वर्गों के बीच महत्वपूर्ण अंतर यह है कि क्रिप्टोकरेंसी एक ब्लॉकचेन की मूल संपत्ति है( native asset) – जैसे BTC or ETH. जबकि टोकन एक ऐसे प्लेटफॉर्म के हिस्से के रूप में बनाए जाते हैं जो मौजूदा ब्लॉकचेन पर बनाया गया है, जैसे कि कई ERC- 20 जो Ethereum Blockchain पर बनाये गए हैं.
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ऑप्शन चैन क्या है इसे कैसे पढ़े ? What is Option chain?

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ऑप्शन चैन क्या है इसे कैसे पढ़े ? What is Option chain? ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है | कॉल ऑप्शन क्या है | डेरिवेटिव क्या है | फ्यूचर ट्रेडिंग क्या है | ऑप्शन मीनिंग इन हिंदी | पुट क्या होता है | ऑप्शन ट्रेडिंग मराठी | Option trading in Hindi pdf | ऑप्शन चैन को कैसे समझें? |ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे की जाती है? | ऑप्शन ट्रेडिंग में कितना चार्ज लगता है? |ऑप्शन ट्रेडिंग क्या होती है in Hindi? इन सभी सवालों के जवाब इस पोस्ट पर

ऑप्शन चैन क्या है इसे कैसे पढ़े ? What is Option chain?

इस पोस्ट पर कवर होने वाले सभी महत्वपूर्ण टॉपिक्स जो एक ट्रेडर को जानना जरुरी है, उन सभी मुख्य बिंदुओं को मै पोस्ट पर कवर किया हु इन्हे अध्ययन करने के बाद आपको काफी कुछ ऑप्शन चैन के बारे में जानकारी मिलने वाली है अतः  इस पोस्ट को आप जरू पूरा पढ़े

क्या आप एक डे ट्रेडर (Day Trader) है ?

A) ऑप्शन चैन क्या होती है? (What is Option chain?)

B) ऑप्शन चैन को कैसे समझते है ? (How to undertand Option Chain?)

(1) ऑप्शन के प्रकार (Options Types)
(2) स्ट्राइक मूल्य (Strike Price)
(3) ओपन इंट्रेस्ट (OI)
(4) ओपन इंट्रेस्ट में बदलाव (Chng in Ol)
(5) ओपन इंट्रेस्ट वॉल्यूम (Open Interest Volume)
(6) अंतर्निहित अस्थिरता (Implied Volatility)
(7) अंतिम ट्रेडेड मूल्य (Last Traded Price)
(8) शुद्ध परिवर्तन (Net Change)
(9) बोली मात्रा (Bid Qty)
(10) बोली मूल्य (Bid Price)
(11) पूछा हुवा मूल्य (Ask Price)
(12) पूछी हुवी मात्रा (Ask Qty)

क्या आप एक डे ट्रेडर (Day Trader) है ?

ऑप्शन ट्रेडिंग (Option Trading) शुरु करने से पहले ऑप्शन चैन चार्ट (Option Chain Chart) को समझना आपको बहुत जरुरी है, हलाकि शुरू के समय में आपको ऑप्शन चैन चार्ट का डेटा बहुत ही जटिल तथा भूलभुलैया की तरह लगता है। और इसको समझना भी काफी कठिन आपको लग सकता है । इस आर्टिकल के जरिये , मै आपको उसी कठिनाई समस्या को कम करने की कोशिश करने वाला हूँ । इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप ऑप्शन चैन को अच्छी तरह से आसानी से समझ पाएंगे ।

बहुत सारे ट्रेडर्स के मन में सवाल आते है की

“स्टॉक ऑप्शन चैन कैसे पढ़ा जाए “? (How to read option chain?)
“ऑप्शन चैन को किस प्रकार खोजे” ? (How to Find Option Chain?)
” ऑप्शन चैन चार्ट का विश्लेषण किस प्रकार करे “?

ऑप्शन चैन एक ऐसा चार्ट होता है, जो ट्रेडर को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराता है, जो एक ट्रेडर को लाभदायक निर्णय लेने में काफी मदद करता है। यदि आप भी OPTIONS में लाभदायक ट्रेडर बनने की चाहत रखते हैं तो आपको भी ऑप्शन चैन चार्ट में महारत हासिल करना बहुत ही आवश्यक हो जाती है। यह पोस्ट आपको ऑप्शन चैन की अच्छी समझ हासिल करने में काफी मदद करेगा, इसमें उपस्थित उपलब्ध विभिन्न आंकड़ों से आपकी समझ बढ़ेगा औरआपको सही निर्णय लेने में काफी मदद मिलेगी।
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ऑप्शन चैन क्या होती है? (What is option chain)
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ऑप्शन चैन को कैसे समझते है ? (How to read option chain)

आइए सबसे पहले हम देखते हैं कि ऑप्शन चेन कैसा दिखता है और इसमें उपलब्ध विभिन्न डेटा को हम कैसे समझते हैं। एनएसइ इंडिया (Option Chain in NSE) आपको सभी प्रकार के ट्रेडिंग विकल्पों के लिए ऑप्शन चैन चार्ट (Option Chain Chart) प्रदान करता है। चलिए अब देखते है की ऑप्शन चैन को किस प्रकार ढूंढा जाता है।

(1.) ऑप्शन चैन क्या होती है? What is Option chain?

ऑप्शन चैन एक ऐसी चार्ट लिस्टिंग है जहाँ पर उपलब्ध कॉल (Call) और पुट (Put) के सभी विकल्पों की एक सूची मौजूद होती है। उस लिस्टिंग में अलग-अलग स्ट्राइक प्राइस के लिए प्रीमियम, वॉल्यूम, ओपन इंटरेस्ट आदि की जानकारी उपलब्ध होती है। जो समय समय पर बदलती रहती है।

इसका ऑफिसियल साइट www.nseindia.com पर जाकर Product पर माउस का कर्सर रखे निचे आपको इक्विटी डेरिवेटिव्स (Equity Derivatives) दिखाई देगा आपको उसी पर क्लिक करना है।

ऑप्शन चैन क्या है इसे कैसे पढ़े ? What is Option chain?
आप इक्विटी डेरिवेटिव (Equity Derivatives) पर जैसे ही क्लिक करेंगे आप निचे जो इमेज वाले पेज पर आ जायेंगे यही option चैन है .

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option chain इस पृष्ठ पर कॉल और पुट ऑप्शन होती है जो अलग अलग भागों में विभाजित होती है बाईं ओर कॉल ऑप्शन तथा दाएं ओर put ऑप्शन का डाटा मौजूद होता है .

ऑप्शन चैन क्या है इसे कैसे पढ़े ? What is Option chain?

option chain के सेंटर में विभिन्न स्ट्राइक प्राइस होता है .

ऑप्शन चैन क्या है इसे कैसे पढ़े ? What is Option chain?

स्ट्राइक प्राइस के दोनों किनारों पर विभिन्न डेटा रहता है जैसे कि OI, Change in Oi, Volume, Iv, LTP, Net Chang, Bid Qty, ask price, ask Qty

ऑप्शन चैन क्या है इसे कैसे पढ़े ? What is Option chain?

हमें देखने के लिए मिलता हैं दोनों तरफ का डाटा अलग-अलग कलर में विद्यमान होती है या उस को हाइलाइट किया गया है और बाकी सफेद रंग में हैं.

ऑप्शन चैन क्या है इसे कैसे पढ़े ? What is Option chain?

(2) ऑप्शन चैन को कैसे समझते है ? How to undertand Option Chain?

ये ऑप्शन चैन चार्ट के विभिन्न भाग है। आईये, अब हम ऑप्शन चैन के प्रत्येक भाग को विस्तार से समझते है (Option chain Explained)

(1) ऑप्शन के प्रकार (Options Types)

ऑप्शन मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं; कॉल (Call) और पुट (Put)। कॉल (Call) ऑप्शन एक ऐसा है कॉन्ट्रॅक्ट है जो आपको एक निश्चित मूल्य पर और ऑप्शन की समाप्ति
तिथि के भीतर शेयर खरीदने का अधिकार देता है। कृपया याद रखें कि कॉन्ट्रॅक्ट आपको अधिकार भर देता है लेकिन आपके लिए शेयर खरीदना अनिवार्य नहीं है।

दूसरी तरफ देखे तो एक पुट (Put) ऑप्शन, एक ऐसा कॉन्ट्रॅक्ट है जो आपको अधिकार देता है, लेकिन निर्देशित मूल्य पर और ऑप्शन की समाप्ति तिथि के भीतर ही शेयर को बेचने की बाध्यता नहीं देता है। यहां पर फिर से यह कॉन्ट्रॅक्ट आपको अधिकार देता है लेकिन आपके लिए शेयर को बेचना अनिवार्य नहीं है।

(2) स्ट्राइक मूल्य (Strike Price)

स्ट्राइक मूल्य (Strike Price) वही मूल्य होता है जिसे आप ऑप्शन के खरीदार और विक्रेता के रूप में कॉन्ट्रॅक्ट का पालन करने के लिए सहमत होते हैं। आप का ऑप्शन ट्रेड(Option Treade ) तभी लाभदायक हो सकता है, जब आप किसी कॉन्ट्रॅक्ट की प्राइस की स्ट्राइक प्राइस को पार कर ऊपर जाएगी है।

Option Chain के दोनों तरफ का एक डाटा उपलब्ध होता है जो इस प्रकार है जैसे OI, Chng in Ol, Volume, IV, LTP, Net Chng, Bid Qty, Bid Price, Ask Price और Ask Qty, आदि तो आइए हम एक एक करके इसके बारे में समझते हैं कि उनमें से प्रत्येक का मतलब क्या होता है।

(1) ओपन इंट्रेस्ट (OI)

Open Interest एक ऐसा डेटा होता है जो किसी ऑप्शन के एक विशेष स्ट्राइक प्राइस में सभी ट्रेडर्स के हित को दर्शाने के लिए मदद करता है। Open Interest आप को बताए गए कॉन्ट्रॅक्ट की चालू संख्या के बारे में भी जानकारी देता है जो कि Market में Tread किए जाते हैं। किसी Option के विशेष स्ट्राइक प्राइस के लिए ट्रेडर्स के बीच संख्या जितनी अधिक होती है , उतना ही अधिक ब्याज देना होता है । इसलिए हमें उचित होने पर ही आप अपने ऑप्शन का ट्रेड करने के लिए सोचना चाहिए हैं।

(4) ओपन इंट्रेस्ट में बदलाव (Chng in Ol)

यह सभी ट्रेडर को समाप्ति अवधि के भीतर ही ओपन इंटरेस्ट में बदलाव के बारे में बताता है। एक ट्रेडर को ओपन इंट्रेस्ट में परिवर्तन को सावधानीपूर्वक हमेशा निगरानी करते रहना चाहिए।

(5) ओपन इंट्रेस्ट वॉल्यूम (Open Interest Volume)

ओपन इंट्रेस्ट वॉल्यूम (Open Interest Volume) ऑप्शन में ट्रेडर्स के हित का एक और संकेत देता है। Open Interest Volume यह हमें बताता है कि बाजार में किसी विशेष स्ट्राइक प्राइस पर जो भी ऑप्शन कॉन्ट्रॅक्ट का कारोबार किया जाता है। इसकी गणना प्रति दिन के आधार पर की जाती है। वॉल्यूम आपको और ट्रेडर्स के बीच मौजूदा रुचि को समझने में काफी मदद करती है ।

(6) अंतर्निहित अस्थिरता (Implied Volatility)

अंतर्निहित अस्थिरता का मतलब है, IMPLIED VOLATILITY यानि इन्हे हम संछिप्त में (IV) कहते है, यह हमें प्राइस की हलचल के बारे में हमें बताता है । एक अच्छा उच्च अंतर्निहित अस्थिरता (Implied Volatility) का आशय है कि कीमतों में उच्च रुझान की संभावना और कम अंतर्निहित अस्थिरता (Implied Volatility) का मतलब है कम रुझान की संभावना ।अंतर्निहित अस्थिरता हमें ऊपर की ओर हो या नीचे की ओर की दिशा के बारे में नहीं बताता है।

(7) अंतिम ट्रेडेड price (Last Traded Price)

अंतिम ट्रेडेड प्राइस का मतलब यह है की आखरी ट्रेड प्राइस जो भी मूल्य पर स्टॉक ट्रेड कर रहा है उसे ही अंतिम ट्रेडेड price (Last Traded Price) कहते है।

(8) शुद्ध परिवर्तन (Net Change)

यह अंतिम ट्रेडेड प्राइस में तत्काल शुद्ध परिवर्तन है। सकारात्मक परिवर्तन यानि की प्राइस में वृद्धि, यह हरे रंग में रंगीत दिखाई दिए जाते हैं जबकि नकारात्मक परिवर्तन प्राइस में लाल रंग में रंगीत दिखाई दिए जाते हैं ।

(9) बोली मात्रा (Bid Qty)

यह किसी विशेष स्ट्राइक प्राइस के लिए शेयर खरीदने की संख्या है। यह आपको एक ऑप्शन के स्ट्राइक प्राइस की मौजूदा मांग के बारे में भी बताता है।ट्रेडर को इसके बारे जानना जरुरी हो जाता है।

(10 ) बोली मूल्य (Bid Price)

यह वह प्राइस है जिस रेट पर आखरी खरीद दार ने ऑप्शन ख़रीदा होता है। इसलिए अंतिम ट्रेडेड प्राइस से अधिक कीमत बतला सकती है कि ऑप्शन की मांग अब बढ़ रही है, या कम हो रही है ।

(11) पूछा हुवा मूल्य (Ask Price)

यह वह प्राइस है जिस रेट पर आखरी खरीद दार ने ट्रेड में शेयर बेचा रहता है।

(12) पूछी हुवी मात्रा (Ask Qty)

यह एक विशेष प्रकार का स्ट्राइक प्राइस के लिए खुले विक्रय आदेशों की संख्या होती है। यह आपको ऑप्शन के लिए सप्लाई के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करता है ।

अब हम समझते हैं की option Chain का एक हिस्सा ऐसे अलग कलर में क्यों हाइलाइट किया जाता है, जबकि बाकी को सफेद रंग में हाइलाइट किया जाता है। इसे समझने के लिए, हमें सबसे पहले ITM, ATM और OTM को जानने की आवश्यकता है ।

इन-द-मनी (ITM): – आईटीएम में एक कॉल का ऑप्शन है, यदि इसका स्ट्राइक प्राइस मौजूदा बाजार मूल्य से कम रहता है तो उसे ITM CALL कहा जाता है और एक पुट OPTION का ITM होता है यदि इसका स्ट्राइक price मौजूदा बाजार मूल्य से अधिक रहता है, तो उसे ITM PUTकहा जाता है ।

एट-द-मनी (ATM):- जब भी कोई कॉल या पुट OPTION का स्ट्राइक प्राइस वर्तमान बाजार प्राइस के बराबर होता है तब उसको एटीएम कहा जाता है ।

आउट-द-मनी (OTM):- यदि स्ट्राइक प्राइस वर्तमान बाजार मूल्य से अधिक होता है तो उस कॉल ऑप्शन को OTM कहा जाता है । और इसी प्रकार एक पुट ओटीएम का price वर्तमान बाजार मूल्य से अधिक होता है तो उस पुट ऑप्शन को OTM कहा जाता है।

जो हाइलाइट किया गया हिस्सा है, वह आईटीएम में है, जबकि सफेद रंग में जो हिस्सा है वह ओटीएम हैं। इसलिए कॉल ऑप्शंस के लिए, स्ट्राइक मूल्य को हाइलाइट किया जाता है, जबकि पुट ऑप्शन के लिए भी वर्तमान कीमत से अधिक ऑप्शन स्ट्राइक हो जाता है ।

(13) पूछी हुवी मात्रा (Ask Qty) :-

यह एक विशेष स्ट्राइक प्राइस के लिए खुले विक्रय के आदेशों की संख्या है। यह आपको ऑप्शन के लिए सप्लाई के बारे में पूरा बताता है । share market

El Salvador Club में शामिल हुआ ये देश, Cryptocurrency बिटक्वाइन को बनाया लीगल टेंडर, जानें क्यों उठाया यह कदम

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El Salvador Club में शामिल हुआ ये देश, Cryptocurrency बिटक्वाइन को बनाया लीगल टेंडर, जानें क्यों उठाया यह कदम

सबसे पहले एल सल्वाडोर ने बिटक्वाइन को आधिकारिक तौर पर करेंसी के रूप में मान्यता दी है ,अब और एक देश इस एल सल्वाडोर के क्लब में शामिल हो गया है। यहाँ पर सोने और हीरे के भंडार होने के बावजूद भी गरीब देशों इसको में गिना जाने वाले यह अफ्रीकी देश सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक ने भी बिटक्वाइन को करेंसी के तौर पर अपना लिया।

पूरी दुनिया में Cryptocurrency के प्रति लोगों की दीवानगी लगातार बढ़ती जा रही है, तो दूसरी ओर इसे लीगल टेंडर के रूप में भी मान्यता देने के मामले सामने आ रहे है, कई देश इसमें रुचि दिखा रहे हैं। देखा जाए तो सबसे पहले एल सल्वाडोर ने बिटक्वाइन को आधिकारिक तौर पर करेंसी के रूप में मान्यता दी, उसके बाद अब एक और देश इस क्लब में शामिल हो गया है।

जहाँ पर प्रचुर मात्रा में सोने और हीरे के भंडार होने के बावजूद गरीब देशों के अंतर्गत आता है, या कहे तो उस देश को एक गरीब देश में गिना जाने वाले अफ्रीकी देश सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक ने भी इस करेंसी को अपना लिया है।

नागिरकों के हित में लिया गया फैसला

एक रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक की सरकार ने पिछले बीते बुधवार को बिटक्वाइन को आधिकारिक तौर पर करेंसी के रूप में अपनी मंजूरी दे दी है। गर्व की बात है कि उस देश ने क्रिप्टोकरेंसी को करेंसी के रूप में अपनाने के लिए यहां की संसद में एक बिल पेश किया गया था, और सर्वसम्मति से स्वीकार भी कर लिया गया है।

उस देश के राष्ट्रपति फॉस्टिन अर्चेंज टौडेरा ने अपने कार्यालय की ओर से जारी किए गए बयान के आधार पर देश के सभी नागरिकों का दैनिक जीवन को सुधारने के ख्याल से यह फैसला लिया गया है।

काफी लंबे समय तक यह देश हिंसा की भरी मार झेलने वाले देश के राष्ट्रपति ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा है कि यह कदम उस देश के सभी नागरिकों का दैनिक जीवन स्तर को सुधारने में काफी मदद करेगा तथा यह फैसला सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक के लिए बड़े अवसरों का द्वार खोलने में मदद करेगा।

एल सल्वाडोर ने उठाया 2021 में था यह कदम

बिटक्वाइन को एक करेंसी के रूप में मान्यता देने के मामले में पूरी दुनिया का यह पहला देश एल साल्वाडोर है। जहाँ पर बीते साल सात सितंबर 2021 को बिटक्वाइन को एक करेंसी के रूप में अपना लिया गया था। यहीं नहीं उस देश में बिटक्वाइन सिटी बनाने की चर्चाएं भी सामने आई थीं उस समय।

एक रिपोर्ट के मुताबिक,फैसले को रोलआउट करने के लिए एल साल्वाडोर ने 400 बिटकॉइन भी खरीदे थे, उस समय बिटकॉइन कीमत ट्रेडिंग प्राइस के हिसाब से देखा जाए तो करीब 21 मिलियन डॉलर थी। अभी वर्तमान समय में इसकी कीमत में गिरावट के बावजूद भी आसमान छू रही है।

इस सूची में क्यूबा भी हुआ शामिल

एल सल्वाडोर के बाद एक अलग देश क्यूबा ने भी अपने यहां क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी रूप से मान्यता देने का फैसला किया है। एक ओर देखा जाए जहां पर एल सल्वाडोर में दक्षिण पंथी सरकार माना जाता है।

क्यूबा सरकार के अनुसार क्यूबा का सेंट्रल बैंक इस समय क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को सामाजिक-आर्थिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए अधिकृत करने की मान्यता दे सकता है।

कनाडा और इजरायल भी पक्ष में

एक रिपोर्ट के अनुसार, जानकारी मिली है की कनाडा राजस्व प्राधिकरण (सीआरए) आम तौर पर अपने देश के आयकर अधिनियम के प्रयोजनों के लिए क्रिप्टोकरेंसी को एक वस्तु के रूप में मानता है। इजरायल देश ने भी अपने वित्तीय सेवा कानून के तहत वित्तीय परिसंपत्तियों के तौर पर आभाषी करेंसी को अपनी करेंसी के रूप में शामिल कर लिया है।

इजरायल में क्रिप्टोकरेंसी को वित्तीय परिसंपत्ति मानते हुए उस पर 25 % कैपिटल गेन टैक्स लगाया है। जर्मनी ने भी क्रिप्टोकरेंसी को फाइनैंशियल इंस्ट्रूमेंट के रूप माना है।

इसके लिए थाइलैंड में लेना होता है लाइसेंस

इन सभी देशों के अलावा थाइलैंड भी शामिल है। यहां पर डिजिटल एसेट्स में बिजनेस करने के लिए लाइसेंस लेना होता है। यहां पर आपको बता दें कि इनमें से ज्यादातर देशों ने क्रिप्टोकरेंसी को लीगल टेंडर के रूप में नहीं माना है,

लेकिन भी ये देश इस बात से वाकिफ हैं कि आज वर्तमान समय में अभी इनकी कितनी वैल्यू है। इसलिये ये सभी देश इन्हें एक्सचेंज के माध्यम से या फिर यूनिट्स ऑफ अकाउंट के रूप में मानते हैं।

विश्व की सबसे महंगी Currency कौन सी है, क्या आपको पता है?

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विश्व की सबसे महंगी Currency कौन सी है, क्या आपको पता है? विश्व की सबसे महंगी Currency कौन सी है,Which most expensive currency world सबसे महंगी मुद्रा क्या है| दुनिया की 10 सबसे महंगी करेंसी भारत की करेंसी कितने नंबर पर है महंगी मुद्रा का अर्थ दुनिया की सबसे कमजोर करेंसी दिनार किस देश की करेंसी है कुवैत करेंसी सबसे बड़ा पैसा कहां का है भारत बनाम अन्य देश की मुद्रा इस तरह का प्रश्न आपके मन में है तो इस पोस्ट को जरूर पूरा अध्ययन करें

विश्व की सबसे महंगी Currency कौन सी है, क्या आपको पता है? कुवैती दीनार पूरी दुनिया की सबसे महंगी मुद्रा (Currency ) है. आइए हम सभी जानते हैं की यह मुद्रा दुनिया कि सबसे महंगी मुद्रा कैसे है.

विश्व की सबसे महंगी Currency कौन सी है क्या आप इसके बारे में जानते है?

आज के इस वर्तमान समय में मुद्राएं हमारे लिए कितनी जरूरी ये तो हम सभी लोग जानते ही हैं. किसी भी प्रकार की काम, चीज या सुख सुविधा को खरीदने के लिए हम सभी को करेंसी की जरुरत पड़ती ही है. यानी की हम यह समझ सकते हैं कि आज के वर्तमान समय में मुद्राओं के बिना जिंदगी जीना असंभव सा लगता है.

प्राचीन काल में यह संभव था क्योंकि उस ज़माने में वस्तु विनिमय प्रणाली चलती थी. उस समय वस्तु विनिमय प्रणाली के द्वारा लोग एक वस्तु को दूसरे वस्तु से बदल देते थे. इसका आशय यह है की जिस व्यक्ति को यदि चावल देने से बदले में किसी आदमी से कोई और अनाज या कोई और वस्तु उनके जरुरत के अनुसार मिल जाती थी।

मुद्रा का इस्तेमाल

पुराने ज़माने में विश्व के सभी देशों में व्यापार और चीजों को खरीदने बेचने के लिए वस्तु विनिमय प्रणाली का ही इस्तेमाल या प्रयोग होता था. आज के वर्तमान समय में हर एक देश की उसकी एक अपनी अलग मुद्रा (currency) होती है जिसके माध्यम से उस देश के लोग अपने देश में कोई भी चीज , वस्तु , सर्विस या सुविधा खरीदते और बेचने के लिए प्रयोग करते हैं.

आज हर देश की मुद्रा और उसकी कीमत भिन्न भिन्न होती है. इसका मतलब यह है जब हम किसी को दूसरे देश की मुद्रा का इस्तेमाल हमारे भारत में करना हैं तो भारतीय मुद्रा में उसको सबसे पहले परिवर्तित करना होगा तो उसकी कीमत बदल जाती है.

क्यों बढ़ती-घटती है मुद्रा की कीमत?

चलिए उदाहरण के लिए अगर हम लोग 1 US डॉलर को भारतीय मुद्रा में परिवर्तन करके देखते है, मान ले अभी उसकी कीमत 72.89 ₹ (इंडियन करेंसी ) में है। यह कीमत समय के मुताबिक कभी बढ़ती है तो कही घटती रहती है.

किसी भी अन्य देश की मुद्रा (currency) के मजबूत या कमजोर होने का प्रमुख कारण उस मुद्रा (currency) का उपयोग होता है. हर देश के पास दूसरे देशों के मुद्राओं का भंडार भी होता है, जिनका उपयोग अन्य देशों के लेन- देन के लिए होता है. इन्हीं सभी मुद्रा भंडारों के घटने या बढ़ने से मुद्रा की कीमत में भी परिवर्तन होती रहती है.

विश्व की सबसे महंगी Currency कौन सी है

अंतरराष्ट्रीय कारोबार में पूरी दुनिया के अधिकतर देशों के द्वारा यूएस डॉलर का अधिक प्रयोग या इस्तेमाल किए जाने और अधिकतर देशों में स्वीकार किए जाने की वजह से यूएस डॉलर को वैश्विक मुद्रा का स्थान मिला है और US मुद्रा के भंडार कम या अधिक होने पर हमारे भारतीय रुपए के मजबूत और कमजोर होने का अनुमान आसानी से लगाया जाता है.

दुनिया की सबसे ताकतवर मुद्रा

कुवैत देश की मुद्रा (currency) पूरी दुनिया की सबसे ताकतवर मुद्रा के रूप में आज सामने है और इसका मुख्य कारण यहां पर भारी मात्रा में पाए जाने वाले तेल का भंडार है। जो कुवैत देश पूरी दुनिया में इस तेल का निर्यात करता है. इस देश का करेंसी कोड KWD है। 1 दीनार की कीमत हमारे भारत के 249.56 रुपए के बराबर है. ये कीमत समय के अनुसार कभी घटती-बढ़ती रहती है।

देखा जाये तो आज के आधुनिक समय में कुवैती दीनार पूरी दुनिया की सबसे महंगी करेंसी मानी जाती है. क्या आप को पता है, कि आज से करीब 70-80 वर्ष पहले कुवैत में जो करेंसी किया गया था उसे हमारे भारत सरकार जारी की थी. यानि RBI उस समय में कुवैत की करेंसी बनाया करता था और उस समय उस करेंसी का नाम था गल्फ रुपि (Gulf Rupee) यह काफी हद तक हमारे भारतीय रूपया से मिलता जुलता था.

उस समय इस गल्फ रूपी की खासियत यह थी की इसे भारत के अंदर इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं था. फिर भी 1961 में कुवैत को अंग्रेजी सरकार यानि (अंग्रेजों )से आजादी मिली थी। उसके बाद 1963 में कुवैत एक अरब कंट्री बन गई। जहां पर एक नए सरकार का चुनाव हुआ और शासन अभी सुचारु रूप से चल रहा है।

आप नहीं जानते है, तो आपको बता दें की 1960 में कुवैती सरकार ने पहली बार अपनी पहली कुवैती करेंसी को जारी किया था. उस समय कुवैती करेंसी कीमत हमारे भारतीय रुपये के अनुसार देखा जय तो 13 रुपये पर 1 कुवैती दीनार था. लेकिन 1970 में कुवैती दीनार का इंटरनेशनल मार्केट में एक्सचेंज रेट फिक्स कर दिया गया जिसके वजह से कुवैती दीनार आज भी फिक्स्ड रेट पर ही है.

अब आप सोचिये की इतने सारे फायदे और नुकसान के बिच भी कुवैत का दीनार पूरी दुनिया की सबसे महंगी और मजबूत करेंसी कैसे बनी हुई है. इन सभी के पीछे एक ही वजह है वहाँ से निकलने वाला तेल। कुवैत के पास पूरी दुनिया का सबसे बड़ा तेलों का खदान है। इसी तेल के दम के चलते आज भी कुवैती दीनार की सबसे ज्यादा है.

उम्मीद है इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप सभी को विश्व की सबसे महंगी एवं मजबूत करेंसी कौन है इस बारे में इस पोस्ट पर जानकारी उपलब्ध कराई गई है यदि आपको अच्छा लगा तो जरूर कमेंट करें धन्यवाद

सबसे बड़े 10 IPO (Top 10 biggest IPO) के बारे में जाने इसमें किसने कितना ज्यादा पैसा जुटाया

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सबसे बड़े 10 IPO के बारे में जाने सबसे बड़े 10 ipo Top 10 biggest IPO in India Biggest IPO in India 2022 world’s biggest ipo – saudi aramco Biggest IPO in world World largest IPO 2020 Upcoming biggest IPO in India LIC Jeevan Shiromani Plan details In Hindi Biggest IPO of 2023  इसमें किसने कितना ज्यादा पैसा जुटाया, कौन लोगों ने कितना पैसा कमाया या लुटाया इस बारे में आपको अच्छी जानकारी मिलने वाली है इसलिए इस पोस्ट को अवश्य अध्ययन करें इस पोस्ट में आपको आईपीओ के बारे में अच्छी जानकारी मिलने वाली है।

सबसे बड़े 10 IPO (Top 10 biggest IPO) के बारे में जाने इसमें किसने कितना ज्यादा पैसा जुटाया, कौन लोगों ने कितना पैसा कमाया या लुटाया। 

LIC इंडिया का आईपीओ 4 मई को आम निवेशकों के लिए खुल जाएगा. इसके लिस्टिंग के बाद ये हमारे भारत देश का सबसे बड़ा लिस्ट हो चुका IPO बन जाएगा. इससे पहले अभी तक कौन-से आईपीओ टॉप 10 की लिस्ट में मौजूद हैं? आप अवश्य जानिए।

LIC का आईपीओ देश में 4 मई को सभी आम निवेशकों के लिए खुल जाएगा. इसके लिए 9 मई तक आप अप्लाई कर सकते है. हालांकि भारत सरकार ने इस इश्यू के साइज़ को 5 % से घटाकर 3.5 % कर दिया गया है, लेकिन अभी भी LIC इंडिया का आईपीओ भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होने वाली है. भारत सरकार इसके लिए कुल 22.13 करोड़ शेयर इस आईपीओ के जरिए बेचने की फैसला की. इस तरह से करीब 20,557 करोड़ रुपये जमा किये जाएंगे. पहले भारत सरकार इससे तकरीबन 60,000 करोड़ रुपये जुटाना चाह रही थी।

नंबर 1: – सबसे बड़ा आईपीओ पेटीएम

रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक का लिस्ट हो चुके शेयरों में सबसे बड़ा आईपीओ पेटीएम (One97 Communications Ltd.) का है. यह (Top 10 biggest IPO) में आता था इनका आईपीओ साइज 2.46 बिलियन डॉलर था. इस आईपीओ का इश्यू प्राइस 2150 रुपये रखा गया था, जबकि पहले ही दिन में 1560.80 पर क्लोजिंग हुई थी . यह पहले ही दिन में 27.4 % गिर गया था.

नंबर 2: कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Ltd)

दूसरे नंबर पर कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Ltd) ने आईपीओ के जरिए 2.05 बिलियन डॉलर जमा किये थे. यह शेयर 4 नवम्बर 2010 को लिस्ट हुआ था उसी दिन 39.8 % की तेजी के साथ 342.55 रुपये पर जाकर बंद हुआ था. इसका शेयर का इश्यू प्राइस 245 रुपये था. इसने सभी निवेशकों को मालामाल कर दिया .

नंबर 3: जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GENA)

एलआईसी इंडिया के आईपीओ के लॉन्च होने तक तीसरे नंबर पर जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GENA) का आईपीओ देश का तीसरा सबसे बड़ा आईपीओ रहा है. यह (Top 10 biggest IPO) में आता था। इसने मार्केट से 1.52 बिलियन डॉलर जमा किये थे. यह 25 अक्टूबर 2017 को लिस्ट हुआ और लिस्टिंग के ही दिन ही यह शेयर 52.1 फ़ीसदी फिसलकर 437.15 रुपए पर जाकर बंद हुआ था. इस शेयर इश्यू प्राइस ₹912 रखा गय था.

नंबर 4: एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज लिमिटेड (SBI Cards)

चौथे नंबर पर 16 मार्च 2020 को भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट होने वाला एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज लिमिटेड (SBI Cards) का शेयर हमारे भारत देश का चौथा सबसे बड़ा आईपीओ रहा था . इस कंपनी ने बाजार से 1.39 बिलियन डॉलर जमा किये थे. इसके आईपीओ का शेयर इश्यू प्राइस ₹755 था. यह पहले ही दिन में खुलने के बाद यह स्टॉक 9.7 फ़ीसदी गिरकर 681.4 रुपया पर बंद हुआ था.

नंबर 5: रिलायंस पावर लिमिटेड

हमारे देश भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा पांचवां आईपीओ रिलायंस पावर लिमिटेड का रहा है. इस आईपीओ के माध्यम कंपनी ने बाजार से 1.36 बिलियन डॉलर जमा किये थे. इस शेयर का इश्यू प्राइस ₹450 रखा गया था. यह 11 फरवरी 2008 को लिस्ट हुआ था और उसी दिन इसका शेयर प्राइस 48.3 % गिरकर 232.69 पर बंद हो गया.

नंबर 6: न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड अब तक का नंबर 6 का सबसे बड़ा आईपीओ था. यह (Top 10 biggest IPO) में आता था। इस कंपनी ने आईपीओ के माध्यम से 1.29 बिलियन डॉलर की रकम बाजार से जमा की थी. 800 रुपया इस शेयर का इश्यू प्राइस था, जबकि यह शेयर 13 नवंबर 2017 को लिस्टिंग हुआ था और उसी दिन यह शेयर 54.6 % गिरकर 363.55 रुपए पर बंद हुआ था .

नंबर 7: जोमैटो लिमिटेड

जोमैटो लिमिटेड का आईपीओ 23 जनवरी 2021 को लिस्ट हुआ था. इसने बाजार से 1.26 बिलियन डॉलर जमा किये थे. सभी निवेशकों को आईपीओ 76 रुपया प्रति शेयर के हिसाब से मिला था. यह शेयर लिस्टिंग के दिन ही इसमें 65.8 % का उछाल आया और यह ₹126 पर बंद हुआ था .इसमें निवेशकों काफी फायदा हुआ। यह आईपीओ अभी तक का सातवां सबसे बड़ा आईपीओ रहा है.

नंबर 8: डीएलएफ लिमिटेड

डीएलएफ लिमिटेड ने 1.24 बिलियन डॉलर रकम उठाने के लिए अपना आईपीओ बाजार में उतारा था. इसे 525 रुपया प्रति शेयर के हिसाब से बेचा गया था . यह 5 जुलाई 2007 को पहले ही दिन में यह शेयर 8.5 % चढ़कर 569.8 पर बंद हुआ था . यह भी भारतीय इतिहास का आठवां सबसे बड़ा आईपीओ माना जाता है.

नंबर 9: एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस

एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस 17 नवंबर 2017 को लिस्ट हुआ जिसे अब एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के नाम से भी जाना जाता है, यह (Top 10 biggest IPO) में आता था। इस आईपीओ के माध्यम से कंपनी ने बाजार से 1.17 बिलियन डॉलर जमा किये थे. यह कंपनी ने 290 रुपया प्रति शेयर के हिसाब से आईपीओ अलॉट किया था. इसके लिस्टिंग के दिन ही इसका शेयर प्राइस 344.6 रुपए पर बंद हुआ था , इसका मतलब 18.8 % की वृद्धि के साथ मार्केट बंध हुआ. यह हमारे देश का अब तक का नौंवा सबसे बड़ा आईपीओ रहा है. यह एलआईसी के आईपीओ के बाद दसवें नंबर पर हो जाएगा.

नंबर 10: एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड

एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड 3 अक्टूबर 2017 को इनका आईपीओ बाजार में लिस्ट हुआ था. इसमें अपने आईपीओ के द्वारा 1.13 बिलियन डॉलर जमा थे. इसके आईपीओ का इश्यू प्राइस 700 रखा गया था. यह पहले ही दिन में इस स्टॉक ने 707.55 रुपए बढ़त पर क्लोजिंग दी थी. यह शेयर इस दिन लगभग 1.1 फ़ीसदी रिटर्न दे रहा था. यह शेयर अब तक का हमारे देश का दसवां सबसे बड़ा आईपीओ रहा है. एलआईसी का आईपीओ आने के बाद यह टॉप 10 की लिस्ट से बाहर हो जाएगी.

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LIC IPO Open : एलआईसी के आईपीओ का प्राइस बैंड तय हो गई, जानिए कितनी रखी गई है एक Share की Price

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LIC IPO Open : एलआईसी के आईपीओ का प्राइस बैंड तय हो गई, जानिए कितनी रखी गई है एक Share की Price LIC IPO share price 2022 LIC IPO Share Price in Hindi How to buy LIC IPO LIC IPO GMP LIC IPO date 2022 price

LIC IPO Open : एलआईसी के आईपीओ का प्राइस बैंड तय हो गई, जानिए कितनी रखी गई है एक Share की Price

सूत्रों के मुताबिक बात सामने आयी है की एलआईसी अपने सभी पॉलिसीधारकों को 60 रुपये की छूट देने वाली है. सूत्रों ने यह भी बताया कि एलआईसी अपने सभी पॉलिसीधारकों को 60 रुपये की छूट देगी.

LIC IPO Open : भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC ) ने अपने आईपीओ (LIC IPO) के लिए प्राइस बैंड 902 से 949 रुपये प्रति एक शेयर तय किया है. यह बात सूत्रों ने मंगलवार को जानकारी दी.

नई दिल्ली में देश के मोस्ट अवेटेड आईपीओ एलआईसी के आईपीओ की तारीख घोषित कर दी गई है. अब LIC का प्राइस बैंड भी सामने आ गया है. सार्वजनिक क्षेत्र के बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने अपने आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 902 से 949 रुपये प्रति एक शेयर तय किया है. इस बात की जानकारी सूत्रों ने मंगलवार को जानकारी दी.

सूत्रों के द्वारा बताया कि एलआईसी अपने सभी पॉलिसीधारकों को 60 रुपये की छूट देने वाली है. वहीं पर खुदरा निवेशकों और कर्मचारियों को 40 रुपये तक की छूट दी जाएगी. भारतीय जीवन बीमा निगम कंपनी आईपीओ चार मई को खुलने की उम्मीद है. वहीं पर इस इश्यू को नौ मई को बंद हो जाने का अनुमान जताया जा रहा है.

LIC IPO Open : एलआईसी के आईपीओ का प्राइस बैंड तय


आईपीओ का साइज घटाया गया

भारत सरकार ने फरवरी में बीमा क्षेत्र के सभी दिग्गज कंपनी में अपनी पांच प्रतिशत हिस्सेदारी या कहें तो 31.6 करोड़ शेयर बेचने की योजना बनाई थी. भारत सरकार ने इसके लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास दस्तावेज भी जमा करा दिए है.

परन्तु रूस-यूक्रेन युद्ध होने के कारण बाजार में आए उतार-चढ़ाव से आईपीओ की योजना भी प्रभावित हो गई.बीते सप्ताह सरकार ने आईपीओ के आकार को 5 % से घटाकर 3.5 % करने का फैसला भी किया.

एंकर इन्वेस्टर्स से मिल रहा जोरदार सपोर्ट

LIC के इस आईपीओ को एंकर इन्वेस्टर्स से जोरदार सपोर्ट मिल रहा है. खबरों की बात मानें तो अब तक एंकर निवेशक 13,000 करोड़ रुपये की निवेश की प्रतिबद्धता/ दक्षता जता चुके हैं. यह बड़ी रकम इन्वेस्टर्स को अलॉट किए गए शेयरों की कुल वैल्यू का लगभग दोगुना बताया जा रहा है.

इस मामले की जानकारी एक जानकार के से पता चला की इन्वेस्टर्स (निवेशक ) को कुल 6,300 करोड़ रुपये के ही शेयर्स अलॉट हुए थे. अभी तक एलआईसी आईपीओ को 100 एंकर इन्वेस्टर्स (निवेशक ) की रुचि प्राप्त हो गई है. इनमें घरेलू और विदेशी दोनों ही तरह की एंकर इन्वेस्टर्स शामिल हैं.

लाइव मिंट ने रॉयटर्स के अज्ञात स्रोतों का जिक्र करते हुए बताया कि एलआईसी प्रबंधन और निवेश बैंकर मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद, राजकोट, कोलकाता सहित हमारे पूरे भारत के 6 शहरों में रोड शो भी शुरू करेंगे, जहां पर वे बुधवार से शुरू होने वाले संभावित निवेशकों और विश्लेषकों से मुलाकात भी करेंगे. रोड शो का कार्यक्रम इस सप्ताह के अंत तक समाप्त होने की संभावना जताई जा रही है.

LIC IPO Open: पहले भारत सरकार देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी में 5% हिस्सेदारी बेचने की तयारी कर रही थी, लेकिन अब यह आईपीओ के जरिये महज 3.5% हिस्सेदारी पेश कश की जाने वाली है। आईपीओ के लिए एलआईसी का कुल वैल्यूएशन 6 लाख करोड़ रुपये किया गया है.

21000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी 

पहले भारत सरकार देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी में 5% हिस्सेदारी बेचने वाली थी, लेकिन आईपीओ के जरिये मात्र 3.5% हिस्सेदारी पेशकश की जाएगी. आईपीओ के लिए एलआईसी का टोटल वैल्यूएशन 6 लाख करोड़ रुपये किया गया है. इस हिसाब से देखा जाए तो अब इस आईपीओ का साइज 21,000 करोड़ रुपये ही होगा. फिर भी एक अधिकारी का कहना यह है कि मार्केट में डिमांड अच्छी रहती है तो सरकार इसे 5% तक बढ़ा भी सकती है.

विनिवेश का लक्ष्य होगा हासिल?

LIC ने सेबी के पास जमा कराए DRHP में आईपीओ के लिए मात्र 5% तक हिस्सेदारी बेचने की अनुमति ली थी. जिसे बाद में घटाकर 3.5 फीसदी कर दी गई है. वहीं पर आईपीओ को लाने के लिए अंतिम तारीख 12 मई है. इसके बाद भी दोबारा सेबी से इजाजत लेनी होगी की जरुरत होगी. ऐसे में भारत सरकार की कोशिश है कि इससे पहले आईपीओ लॉन्च हो जाए.

जब LIC आईपीओ को लेकर चर्चा शुरू हुई थी तब भारत सरकार ने इसका कुल वैल्यूएशन 17 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था. परन्तु अब आईपीओ को हिट कराने के लिए एलआईसी का कुल वैल्यूएशन मात्र 6 लाख करोड़ रुपये किया गया है.

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