Insurance News IRDAI ने जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों से कहा-अपना खर्च घटाएं, पॉलिसीहोल्डर्स को प्रीमियम में दें राहत

IRDAI के ड्राफ्ट के अनुसार सभी कंपनियों की बोर्ड पॉलिसी में सालाना आधार पर कारोबार करने में खर्चों में कमी और कंपनी के एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट में कमी लाने के लिए कदम उठाने पड़ेंगे .

इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने जनरल इंश्योरेंस (general insurance) और हेल्थ इंश्योरेंस (health insurance) के अपने खर्चों की सीमा तय करने के नोटिफिकेशन में इंश्योरेंस कंपनियों को कारोबार और

कमीशन सहित सालाना आधार पर कुल खर्चों में कमी करने का भी आदेश दिया है.

IRDAI के ड्राफ्ट के अनुसार सभी कंपनियों की बोर्ड पॉलिसी में सालाना आधार पर कारोबार करने में खर्चों में कमी और

कंपनी के एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट में कमी लाने के लिए कदम उठाने पड़ेंगे. साथ ही खर्चों में कमी का फायदा पॉलिसीहोल्डर्स को प्रीमियम में कटौती कर देना होगा.

खर्चों की लिमिट तय करने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी

खबर के अनुसार , इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने हेल्थ इंश्योरेंस और जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के खर्चों की लिमिट तय करने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया गया है

इंश्योरेंस कंपनियों के द्वारा लिए गए प्रीमियम के 30 प्रतिशत से अधिक खर्च नहीं होना चाहिए.

एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट में वेतन, फिक्स खर्च और पॉलिसी बिक्री का कमीशन शामिल है.

तय लिमिट से 10 परसेंट अधिक खर्च करने और सॉल्वेंसी तय मानक पर नहीं होने पर कंपनी के टॉप मैनेजमेंट के अधिकारियों को मिलने वाले परफॉर्मेंस भत्ते आदि पर रेगुलेटर को रोका जा सकता है.

हर सेगमेंट के कमीशन में बदलाव नहीं
सिंगल लिमिट नियम बनने पर सरकारी कंपनियों को पॉलिसी बिक्री के लिएअधिक मशक्कत करना पड़ेगा .

ऐसा इसलिए क्योंकि सरकारी कंपनियों (govt insurance company) के खर्च का 70 प्रतिशत तक मैनेजमेंट ऑपरेटिंग खर्च है जो निजी कंपनियों में 30 प्रतिशत ही है.

इसलिए निजी कंपनियां ज्यादा कमीशन, रिवॉर्ड्स और विज्ञापन पर ज्यादा खर्च कर सकती है। हालांकि हर सेगमेंट के कमीशन में बदलाव नहीं किया गया है

लेकिन कारोबार पाने के लिए कंपनियां मार्केटिंग पर अधिक से अधिक खर्च कर पाएंगी.

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